गुरुद्वारा करतारपुर साहिब के रास्ते का मुद्दा आजादी के बाद कई बार चर्चा का विषय बना

सिखों की अटूट आस्था के प्रतीक पाकिस्तान स्थित करतारपुर साहिब को भारत से जोड़ने के लिए एक कॉरिडोर का निर्माण किया गया है। पाकिस्तान की तरफ से भी और भारत की तरफ से भी एक कॉरिडोर बनाया जा रहा है, जिसे पर्यटन स्थल के तौर पर भी विकसित किया जाएगा।

भारत और पाकिस्तान ने नवंबर 2018 में ऐतिहासिक गुरुद्वारा दरबार साहिब को भारत के साथ जोड़ने के लिए करतारपुर कॉरिडोर बनाने पर सहमति जताई थी। इसके तहत पाकिस्तान के कस्बे करतारपुर को पंजाब के गुरुदासपुर जिले में स्थित डेरा बाबा नानक के साथ जोड़ा गया है।

अब कॉरिडोर बन चुका है और प्रतिदिन 5,000 भारतीय तीर्थयात्री इस रास्ते से पाकिस्तान जाकर गुरुद्वारा साहिब के दर्शन कर सकेंगे। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने 28 नवंबर 2018 को करतारपुर कॉरिडोर का नींव पत्थर रखा था। भारत की तरफ से 26 नवंबर 2018 को नींव पत्थर रखा गया था।

गुरुद्वारा करतारपुर साहिब के रास्ते का मुद्दा आजादी के बाद कई बार चर्चा का विषय बना। सात दशक तक दोनों देशों की सरकारें यह रास्ता न खुलवा सकीं। संयुक्त राष्ट्र संघ भी इस मामले में सिखों को कोई बड़ी राहत नहीं दिला सका। लेकिन अब गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व ने इस दूरी को हमेशा के लिए मिटा दिया।

गुरुद्वारा करतारपुर साहिब गुरु नानक देव का अंतिम विश्राम स्थल और निवास स्थान है। यह रावी नदी के पार पाकिस्तान के नरोवाल जिले में लाहौर से 120 किमी दूर स्थित है और डेरा बाबा नानक से इसकी दूरी लगभग चार किलोमीटर है। गुरु नानक जी के माता-पिता और उनका देहांत भी यहीं पर हुआ था।

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