डित जवाहरलाल नेहरू की पुण्यतिथि की तैयारियों को लेकर बुलाई गई बैठक हंगामे की भेंट चढ़ गई

चुनाव में हार-जीत तो लगी ही रहती है, लेकिन उस पर मंथन या चिंतन की बजाए एक-दूसरे के सिर ठीकरा फोड़ने की परंपरा सुधार के स्थान पर स्थिति को और बिगाड़ देती है। ऐसा ही नजारा शनिवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में रखी गई एक बैठक में सामने आया। पंडित जवाहरलाल नेहरू की पुण्यतिथि की तैयारियों को लेकर बुलाई गई बैठक हंगामे की भेंट चढ़ गई। गहमागहमी के साथ हाथापाई की नौबत भी आ गई और कार्यकर्ताओं ने नेताओं पर ही सवाल खड़े कर दिए।

दरअसल, इस बैठक में वरिष्ठ नेताओं की भाषणबाजी के बाद जब कार्यकर्ताओं ने अपनी मन की बात रखी तो कई नेता गुस्सा हो गए और फिर देखते ही देखते हंगामा खड़ा हो गया। बात हाथापाई तक भी पहुंच गई। ऐसे में कई वरिष्ठ नेता तो बैठक से खिसक कर पार्टी कार्यालय की दूसरी मंजिल पर चले गए। जबकि कुछ नेता देर रात तक इस मामले को दबाने में लगे रहे।

इस बैठक में पूर्व केंद्रीय मंत्री जगदीश टाइटलर, पूर्व मंत्री मंगतराम सिंघल, परवेज हाशमी, रमाकांत गोस्वामी, हारून युसूफ, पूर्व सांसद रमेश कुमार, प्रदेश के कार्यकारी अध्यक्ष राजेश लिलोठिया और पूर्व विधायक वीर सिंह धींगान जैसे वरिष्ठ नेता उपस्थित थे। कार्यकर्ताओं में चुनाव की हार को लेकर गुस्सा भरा हुआ था।

एक कार्यकर्ता ने सवाल उठा दिया कि ‘आप लोग आते हैं, भाषण देते हैं और चले जाते हैं, कभी कार्यकर्ताओं की भी सुना करिए। अगर कार्यकर्ताओं की सुनते तो शायद हार नहीं होती।’ इस पर मंच पर बैठे कार्यकारी अध्यक्ष व उत्तर-पश्चिमी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने वाले राजेश लिलोठिया तिलमिला गए और अपनी हार के लिए कार्यकर्ताओं को ही दोषी ठहरा दिया।

सूत्रों की मानें तो लिलोठिया ने अपनी हार के साथ-साथ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की हार का भी जिक्र कर दिया। बोले, हारे तो राहुल गांधी भी हैं। राहुल गांधी की हार का जिक्र आते ही कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने लिलोठिया से कहना शुरू कर दिया कि वह अपनी हार में राहुल गांधी का नाम क्यों ले रहे हैं? इसके बाद लिलोठिया ने भी जमकर भड़ास निकाली। उन्होंने अपने ही कार्यकर्ताओं पर आरोप लगाना शुरू कर दिया कि उनकी वजह से ही उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा।

इस बीच कार्यकर्ताओं में भी आपस में बहस होने लगी। यह गहमागहमी ही हाथापाई तक पहुंच गई। बैठक में मौजूद महिला कार्यकर्ता इस बहस में आपस में ही भिड़ गईं। बताया तो यह भी जा रहा है कि कार्यकर्ताओं ने वहां पर लिलोठिया को प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष के पद से हटाने की मांग भी कर डाली। प्रदेश कार्यालय में यह पूरा ड्रामा करीब 25 से 30 मिनट तक चलता रहा।

लिलोठिया ने कहा कि मैं बैठक में कार्यकर्ताओं को समझाने का प्रयास कर रहा था कि कांग्रेस को एक साजिश के तहत हराया गया है। मेरा कहना था कि अमेठी से राहुल गांधी भी साजिश के तहत ही हारे हैं। कहीं न कहीं ईवीएम की सेटिंग इसके लिए जिम्मेदार हैं। इसी दौरान एक दो महिला कार्यकर्ता बोलने लगीं कि अमेठी में स्मृति ईरानी ने काफी काम किया था। इस बात को लेकर ही कार्यकर्ताओं में गहमागहमी हो गई।

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