पश्चिम एशिया में अस्थिरता के बीच आज भारत-यूएई बैठक

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान सोमवार रात मुंबई पहुंच गए। मंगलवार (20 अक्टूबर) मुंबई में ही उनकी विदेश मंत्री एस.जयशंकर के साथ आधिकारिक बैठक होने वाली है।

यह मुलाकात ऐसे समय हो रही है जब जयशंकर ने महज कुछ दिन पहले (14-16 अक्टूबर) यूएई का तीन दिवसीय आधिकारिक दौरा पूरा किया था और अबूधाबी में शेख अब्दुल्ला से ही मुलाकात की थी। दोनों पक्षों ने उस बैठक को “सौहार्दपूर्ण और सार्थक” बताया था।

आपसी हितों पर गंभीरता से काम

लगातार बैठकों का यह दौर बता रहा है कि पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते हालात के बीच भारत और यूएई आपसी हितों पर बहुत ही गंभीरता से काम कर रहे हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार, “मुंबई बैठक भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी के तहत सहयोग की समीक्षा का अवसर होगी। दोनों पक्ष ऊर्जा, व्यापार, निवेश, फिनटेक, रक्षा और कनेक्टिविटी के क्षेत्रों में चल रही पहलों को आगे बढ़ाने पर चर्चा करेंगे। साथ ही पश्चिम एशिया की स्थिति तथा वैश्विक व बहुपक्षीय मुद्दों पर भी विस्तृत विचार-विमर्श होगा।”

जानकारों का कहना है कि भारत और यूएई के बीच इतने कम अंतराल पर पारस्परिक दौरे वर्तमान क्षेत्रीय परिस्थितियों को रेखांकित करते हैं। पश्चिम एशिया में 2026 में ईरान से जुड़े संघर्ष, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में शिपिंग पर हमले, कच्चे तेल आपूर्ति में कमी व कीमतों में उछाल, साथ ही यमन में हूती गतिविधियों और बाब अल-मंदेब से जुड़े तनाव ने ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री मार्गों को काफी संवेदनशील बना दिया है।

पिछली बैठक का मुंबई में फॉलोअप

यूएई सिर्फ भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए साझेदार नहीं है बल्कि वहां रहने वाले 45 लाख के करीब भारतीयों की सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। जयशंकर की यूएई यात्रा के दौरान दोनों मंत्रियों ने द्विपक्षीय संबंधों के साथ क्षेत्रीय स्थिति पर भी विचार साझा किए थे। अब मुंबई में इसका फॉलोअप हो रहा है।

हाल के वर्षों में भारत और यूएई ने आपसी संबंधों को तेल व श्रम से आगे भी विस्तारित किया है। 2022 में लागू हुए व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीपा) के बाद द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब के पार पहुंच चुका है। दोनों देश 2032 तक इसे 200 अरब डॉलर करने का लक्ष्य रखते हैं। गैर-तेल व्यापार बढ़ा है, स्थानीय मुद्रा (रुपया-दिरहम) निपटान पर काम हो रहा है और यूएई भारत में बड़ा निवेशक है।

मई 2026 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की यूएई यात्रा के दौरान रणनीतिक रक्षा साझेदारी ढांचा तैयार किया गया था। इसमें रक्षा औद्योगिक सहयोग, उन्नत तकनीक, सैन्य प्रशिक्षण, समुद्री सुरक्षा, साइबर रक्षा और सूचना आदान-प्रदान शामिल हैं। मुंबई बैठक में रक्षा और कनेक्टिविटी को आगे बढ़ाने पर जोर होने की उम्मीद है।

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