फिल्म समीक्षा : पतंगबाजी पर बनी पहली फिल्म में ‘गबरू गैंग’ ने जीत ली बाजी

सिनेमा और खेल का जुनून हर भारतीय की रग रग में बसता है और आप सोचें यदि फ़िल्म और स्पोर्ट्स का अद्भुत मिश्रण कर दिया जाए तो वह दर्शकों के लिए कितना मनोरंजनपूर्ण होगा। अब एक हिंदी फिल्म ‘गबरू गैंग’ पतंगबाजी पर आधारित रिलीज हुई है। यह विश्व की पहली ऐसी फ़िल्म है, जो पतंगबाजी पर बेस्ड है। फ़िल्म की स्टोरी पंजाब की पृष्ठभूमि लिए हुए है।

हिंदी सिनेमा जगत में खेल-कूद जैसे विषय पर कई फिल्में बनी हैं। विशेषकर क्रिकेट, फुटबॉल, हॉकी, बॉक्सिंग, बैडमिंटन, दौड़ पर बेस्ड फिल्मों को ऑडिएंस का खूब प्यार भी मिला है। अभिषेक दुहान ने फिल्म ‘गबरू गैंग’ में प्रमुख भूमिका बखूबी निभाई है। अमर मोहिले का बैकग्राउंड म्यूजिक फ़िल्म के दृश्यों को नई ऊर्जा प्रदान करता है। जहां तक फ़िल्म के कथानक का सवाल है वह बहुत ही रोचक है। एक 8 साल का लड़का राजबीर सलूजा अपने दो दोस्तों अरशद और उदय के साथ प्रतिष्ठित पतंग प्रतियोगिता हाई-फ्लाई 1999 में प्रथम पुरस्कार जीतता है और 2011 तक पंजाब में नंबर वन बन जाता है।

सर्वश्रेष्ठ टीम गबरू गैंग सबकी पसंदीदा बन जाती है लेकिन किस्मत में कुछ और ही लिखा था। 2011 में राजबीर दिल्ली शहजादे टीम के हैरी से फाइनल में हार जाता है, क्योंकि उसका ध्यान खेल से हटकर अंतिम दौर में एक लड़की की तरफ चला जाता है। उदय के साथ लड़ाई के बाद राजबीर खेल छोड़ देता है और गबरू गैंग को भंग कर देता है। तकदीर राजबीर को एक बार फिर पतंग उड़ाने के लिए मजबूर करती है, जो कहानी का महत्वपूर्ण मोड़ है। इस स्पोर्ट्स ड्रामा में आगे क्या होता है इसके लिए आपको फ़िल्म देखनी होगी।

अभिनेत्री आरती पूरी ने बुलबुल के किरदार को बहुत ही स्वाभाविक तरीक़े से निभाया हैं। उन्होंने फ़िल्म के दृश्यों के हिसाब से नाटकीयता बनाये रखी है। सच पूछा जाए तो गबरू गैंग एक जादुई सिनेमाई अनुभव है, जहां खेल भावना के साथ और भी कई भावनाएं जाग उठती हैं। फिल्म में राजबीर का मुख्य किरदार अभिषेक दुहान ने बहुत ही अच्छी तरह अदा किया है। उन्होंने एक खिलाड़ी के जज़्बात को भरपूर ढंग से दर्शाया है। बाकी कलाकारों ने भी पतंगबाजी के खेल को सही अंदाज से प्रस्तुत किया है। इसके पीछे निर्देशक समीर खान की मेहनत दिखाई पड़ती है।

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