‘भारत अपनी विदेश नीति सुधारे और दूसरे के मामले में दखल न दे’, जमात-ए-इस्लामी प्रमुख का बयान

बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख ने भारत को ज्ञान दिया है. उनका कहना है कि भारत को अपनी विदेश नीति की समीक्षा करनी चाहिए. भारत के कई काम हैं, जो बांग्लादेश के लोगों को पसंद नहीं है.

बांग्लादेश में लोकतंत्र खत्म हो चुका है. शेख हसीना प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देकर भारत में छिपी हुईं हैं. अंतरिम सरकार बांग्लादेश चला रहा है. इन सबके बीच बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख शफीकुर रहमान ने कहा कि उनकी पार्टी चाहती है कि बांग्लादेश का भारत के साथ अच्छा रिश्ता बना रहे. हालांकि, भारत को हमारे अंदरूनी मामले में दखल नहीं देना चाहिए. एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि बांग्लादेश को चीन, अमेरिका और पाकिस्तान सहित सभी देशों के साथ रिश्तों को बेहतर बनाना होगा. हमें अतीत का बोझ लेकर अब चलने की जरूरत नहीं है.

भारत का हस्तक्षेप हमें पसंद नहीं

रहमान ने कहा कि भारत जमात-ए-इस्लामी को भारत विरोधी मानता है पर यह गलत है. इस सोच में बदलाव की आवश्यकता है. हम किसी भी देश के खिलाफ बिलकुल नहीं हैं. हम सिर्फ बांग्लादेश के समर्थक हैं. हम बांग्लदेश के हित की रक्षा करना चाहते हैं. उन्होंने आगे कहा कि अगर हसीना इस्तीफा देकर भारत नहीं भागतीं तो बेहतर होता. हसीना को कानून का सम्मान करना चाहिए. उन्हें बांग्लादेश वापस आना चाहिए. भारत हमारा पड़ोसी है और लोग हमारे साथ अच्छे, स्थिर और द्विपक्षीय रिश्ते चाहते हैं. उन्होंने कहा कि भारत ने पूर्व में कुछ ऐसी चीजें की जो बांग्लादेशियों को पसंद नहीं आईं.

भारत को अपनी विदेश नीति सुधारनी चाहिए

रहमान ने कहा कि 2014 के बांग्लादेश चुनाव के वक्त ढाका में पदस्थ एक भारतीय राजनयिक ने बताया था कि चुनाव में किन्हें हिस्सा लेना चाहिए और किसे नहीं. यह सच में अस्वीकार्य है. ऐसा नहीं करना चाहिए. भारत को विदेश नीति की समीक्षा करना चाहिए. भारत को दूसरे देशों के मामलों में हस्तक्षेप करना चाहिए. भारत को पाकिस्तान सहित विभिन्न पड़ोसी देशों के साथ रिश्तें बेहतर बनाना चाहिए. उन्होंने बांग्लादेशी हिंदुओं पर हमलों की खबर को नकार दिया है.

बाढ़ मामले में की बात

बाढ़ के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि भारत को पहले ही इसकी सूचना देना चाहिए था. हम इसका बेहतर प्रबंधन कर सकते थे. जिस जगह बांध बनाया गया है, वहां उसे नहीं होना चाहिए था. जमात-ए-इस्लामी की छवि को मीडिया ने गढ़ा है, जिससे हमें बदनाम किया जा सके.

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