भारत ने UN सुरक्षा परिषद में अस्थायी सीट के लिए ठोकी दावेदारी

 भारत ने 2028-29 के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अस्थायी सीट पाने की भारत की दावेदारी के लिए समुद्री सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को मुख्य केंद्र बनाया है।

सुरक्षा परिषद में एक उच्च-स्तरीय चर्चा के दौरान, संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वथानेनी ने जोर देकर कहा कि साझा समुद्री क्षेत्रों को विवाद का केंद्र बनाने की बजाय अधिक सुरक्षित बनाने पर ध्यान देना चाहिए।

भारत अगले साल सुरक्षा परिषद की अस्थायी सीट के लिए चुनाव लड़ रहा है, जिसका कार्यकाल 2028 से शुरू होगा। इसके लिए मतदान अगले साल जून में होगा, जिसमें एशिया-प्रशांत समूह श्रेणी की एकमात्र सीट के लिए भारत और ताजिकिस्तान के बीच मुकाबला होगा।

भारत ने उठाया AI और समुद्री सुरक्षा का मुद्दा

भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वथानेनी ने कहा, ‘भारत ने 2028-2029 के लिए सुरक्षा परिषद में अपनी उम्मीदवारी के लिए AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और समुद्री सुरक्षा को महत्वपूर्ण प्राथमिकताएं माना है।’

हरीश पर्वथानेनी ने आगे कहा, ‘हमारा उद्देश्य स्पष्ट है- तकनीक को मानव सुरक्षा को मजबूत करना चाहिए, न कि उसे कमजोर करना। इसे अवसरों का विस्तार करना चाहिए, न कि असमानता को और इसे हमारे साझा समुद्री क्षेत्रों को अधिक सुरक्षित बनाना चाहिए, न कि विवादों से भरा।’

भारतीय राजदूत ने साइबर खतरों और वाणिज्यिक जहाजों पर होने वाले हमलों के खिलाफ बोलते हुए कहा, ‘विकासशील देशों को अपने समुद्री बुनियादी ढांचे को सुरक्षित रखने और तकनीकी शासन को आकार देने में सार्थक रूप से भाग लेने के लिए तकनीक, प्रशिक्षण और संस्थागत क्षमताओं तक पहुंच की आवश्यकता है।’

हरीश पर्वथानेनी ने हाल ही में वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों के बारे में कहा, ‘ये हमले नाविकों के लिए खतरा पैदा करते हैं, सप्लाई चेन को बाधित करते हैं और विकासशील देशों पर अधिक लागत और आर्थिक अनिश्चितता के रूप में बहुत बुरा असर डालते हैं।’

यह चर्चा ऐसे समय में हुई जब ईरान की नौसेना ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) में तीन तेल टैंकर समुद्री बारूदी सुरंगों (सी माइन्स) से टकरा गए और उनमें आग लग गई। यह घटना समुद्री खतरों को उजागर करती है।

सुरक्षा को मजबूत बनाने का काम करेगा AI

हरीश पर्वथानेनी ने कहा, ‘AI की मदद से सैटेलाइट तस्वीरों, रडार और जहाजों को ट्रैक करने वाले डेटा का विश्लेषण करके समुद्री क्षेत्र की बेहतर समझ बनाई जा सकती है और संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाया जा सकता है।’

भारतीय राजदूत ने आगे कहा, ‘भारत के पास स्थित ‘इंफॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर-इंडियन ओशन रीजन’ (IFC-IOR) यह दिखाता है कि समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने में आपसी सहयोग और जानकारी साझा करना कितना महत्वपूर्ण है।’

पर्वथानेनी ने आगे कहा, ‘हमारा दृष्टिकोण सागर (SAGAR) के विजन यानी क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास और समावेशी समुद्री सहयोग के प्रति हमारी व्यापक प्रतिबद्धता से प्रेरित है।’

भारतीय राजदूत ने आगे कहा, ‘स्वायत्त प्रणालियों (ऑटोनॉमस सिस्टम्स) के बढ़ते इस्तेमाल से यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि कोई घटना किसने की (जिम्मेदारी किसकी है), जवाबदेही किसकी होगी और कहीं अनजाने में स्थिति और न बिगड़ जाए। इसलिए, हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि उभरती तकनीकों को लागू करते समय उचित सुरक्षा उपाय हों, इंसानों की सार्थक निगरानी हो और जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से तय हों।’

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