विदेश मंत्रालय ने यूएन की उच्च स्तरीय बैठकों में भारत का रुख स्पष्ट किया

न्यूयॉर्क (शाश्वत तिवारी)। विदेश मंत्रालय के उच्चाधिकारियों ने न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में 79वें यूएनजीए उच्च स्तरीय सप्ताह के दौरान आयोजित कई बैठकों में भारत का प्रतिनिधित्व किया। विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) तन्मय लाल ने यहां गुरुवार को ‘लीडरशिप फॉर पीस’ पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की खुली बहस में जोर देते हुए कहा कि यूएनएससी को अधिक पारदर्शी, कुशल, प्रभावी, लोकतांत्रिक और जवाबदेह बनने के लिए तत्काल सुधार की जरूरत है। इस दौरान लाल ने कहा कि दुनिया विनाशकारी सशस्त्र संघर्षों से जूझ रही है और यूएनएससी की मौजूदा प्रतिक्रिया अपर्याप्त है, जो इन संघर्षों को रोकने या इनका समाधान करने में विफल रही है। इसके साथ ही सचिव (पश्चिम) ने एलएलडीसी (चारों ओर से भूमि से घिरे विकासशील देश) मंत्रिस्तरीय बैठक में भाग लिया और इस बात पर जोर दिया कि एक पारगमन (ट्रांजिट) देश के रूप में भारत परिवहन और व्यापार को अधिक कुशल एवं प्रभावी बनाने की दिशा में एलएलडीसी और पारगमन देशों के बीच सहयोग को प्राथमिकता देता है।
लाल ने परमाणु हथियारों के सम्पूर्ण उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित बैठक और समुद्र स्तर में वृद्धि से उत्पन्न अस्तित्वगत खतरों से निपटने के लिए यूएनजीए बैठक में भारत का वक्तव्य दिया। उन्होंने आतंकवाद के समर्थन के लिए पाकिस्तान की जमकर आलोचना की। यूएन में भारत के स्थायी मिशन ने ‘एक्स’ पर लिखा सचिव (आर्थिक संबंध) दम्मू रवि ने एशिया सहयोग वार्ता में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि एसीडी के संस्थापक सदस्य के रूप में भारत इस वार्ता प्रक्रिया को आकार देने में सकारात्मक और रचनात्मक भूमिका निभाता रहेगा। वहीं दूसरी ओर विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्रीनिवास गोत्रु ने एलडीसी (अल्प विकसित देश) मंत्रिस्तरीय बैठक में समावेशी, न्यायसंगत और टिकाऊ दुनिया के लिए भारत की प्रतिबद्धता दोहराते हुए एसडीजी की उपलब्धि में तेजी लाने के लिए सामूहिक वैश्विक प्रयास पर जोर दिया।

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