सस्ता होगा एअर इंडिया का टिकट, बदले में कंपनी बंद करेगी खाना-लाउंज की सुविधा

फुल सर्विस एयरलाइन एअर इंडिया अब अपनी घरेलू और दो घंटे तक की छोटी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में खाने को वैकल्पिक बनाने की योजना बना रही है। यह बदलाव अगले एक-दो महीने में लागू हो सकता है।

इस व्यवस्था के लागू होने के बाद जो यात्री खाना नहीं लेंगे, उनके टिकट के दाम में करीब 250 रुपये तक की कमी हो सकती है। यह कदम बढ़ती लागत और कमाई के दबाव को देखते हुए उठाया जा रहा है। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण एयरलाइंस की लागत बढ़ गई है और कमाई पर असर पड़ा है, जिससे एअर इंडिया भी जूझ रही है।

लाउंज सुविधा भी हो सकती है अलग

एअर इंडिया बिजनेस क्लास यात्रियों के लिए एयरपोर्ट लाउंज सुविधा को भी अलग करने पर विचार कर रही है। यानी जो यात्री लाउंज का इस्तेमाल नहीं करेंगे, उन्हें सस्ता टिकट मिल सकता है। मेट्रो शहरों के एयरपोर्ट पर लाउंज का खर्च करीब 1100 से 1400 रुपये प्रति व्यक्ति होता है, जबकि छोटे शहरों में यह 600 से 700 रुपये तक रहता है।

औसतन एक यात्री पर लगभग 1000 रुपये खर्च आता है। कई बिजनेस क्लास यात्री ऐसे होते हैं जो समय की कमी के कारण लाउंज का उपयोग नहीं करते। ऐसे में इस सुविधा को अलग करने से उनके टिकट की कीमत कम हो सकती है।

बढ़ती लागत के कारण बदलाव

जानकारी के मुताबिक, शुरुआत से ही एअर इंडिया टिकट में खाने को शामिल रखती आई है। लेकिन अब एविएशन टर्बाइन फ्यूल की कीमत बढ़ने और रुपये के कमजोर होने से टिकट महंगे हो रहे हैं। भारत जैसे कीमत के प्रति संवेदनशील बाजार में ज्यादा किराया बढ़ाने से यात्री ट्रेन या सड़क का विकल्प चुन सकते हैं।

इसी वजह से एयरलाइन इस तरह के बदलावों पर विचार कर रही है। दुनिया की कई एयरलाइंस पहले ही ऐसी सुविधाओं को अलग कर चुकी हैं। अब फुल सर्विस और लो-कॉस्ट एयरलाइंस के बीच का अंतर भी धीरे-धीरे कम होता जा रहा है।

कंपनी पर आर्थिक दबाव

एअर इंडिया समूह अपने नए नैरो बॉडी विमानों को एअर इंडिया एक्सप्रेस में भेजने की योजना बना रहा है, जहां ज्यादा सीटें होती हैं और लागत कम रहती है। यहां फ्री खाना और लाउंज जैसी सुविधाएं नहीं होतीं। कंपनी कमाई बढ़ाने के लिए बोर्डिंग पास के पीछे विज्ञापन देने जैसे विकल्प भी देख रही है। एयर इंडिया एक्सप्रेस में यह पहले से लागू है।

ईरान से जुड़े युद्ध का असर पूरी दुनिया की एयरलाइंस पर पड़ा है। एअर इंडिया को पिछले वित्त वर्ष में करीब 24 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है और कंपनी अपने निवेशकों टाटा संस और सिंगापुर एयरलाइंस से फंड की मांग कर चुकी है।

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