सामने आये कई पूर्व सैन्य अधिकारी, कहा- किसी ने नहीं लिखा राष्ट्रपति को पत्र!

नई दिल्ली : चुनाव प्रचार के दौरान सेना की कार्रवाइयों का श्रेय लेकर सेना का कथित राजनीतिकरण करने के सम्बन्ध में राष्ट्रपति को सम्बोधित पत्र से कई वरिष्ठ पूर्व सैन्य अधिकारियों ने स्वयं को अलग कर लिया है। राष्ट्रपति को लिखे पत्र को फेक न्यूज बताते हुए इन अधिकारियों ने कहा कि ऐसे किसी पत्र पर उन्होंने हस्ताक्षर नहीं किए। रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण ने भी इस पत्र के मीडिया में प्रचारित किए जाने की निंदा की है। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान निहित स्वार्थी लोगों द्वारा इस तरह की फेक न्यूज फैलाई जा रही है। मीडिया के एक वर्ग में शुक्रवार को इस आशय का एक पत्र प्रचारित किया गया था कि 150 पूर्व सैन्य अधिकारियों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिख कर कहा है कि नेताओं द्वारा सेना का राजनीतिकरण किया जा रहा है। पत्र में कहा गया है कि चुनाव प्रचार के दौरान विंग कमांडर अभिनन्दन वर्तमान का चित्र और सेना की वर्दी का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे सेना का गैर-राजनीतिक स्वरूप प्रभावित होता है तथा सेना के मनोबल पर खराब असर पड़ सकता है। सीमापार आतंकवाद के खिलाफ सेना की कार्रवाई का नेताओं द्वारा श्रेय लिया जाना भी गलत है। पत्र में राष्ट्रपति से आग्रह किया गया है कि वह नेताओं को ऐसा करने से रोकें।

राष्ट्रपति भवन ने इस बात के इनकार किया है कि उसे इस तरह का कोई पत्र मिला है। कई वरिष्ठ पूर्व अधिकारियों ने कहा है उन्होंने ऐसे किसी पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए। पूर्व सेना प्रमुख एसएफ रॉड्रिज ने कहा कि उन्हें नहीं मालूम किस व्यक्ति ने यह पत्र लिखा है। आज के जमाने में किसी भी फेक न्यूज को प्रचारित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सेना गैर राजनीतिक है और वह सरकार के आदेश के अनुसार काम करती है। पूर्व वायुसेना प्रमुख एयर मार्शल एनसी सूरी ने भी कहा कि इस पत्र पर उन्होंने हस्ताक्षर नहीं किए तथा वह इस पत्र के मजमून का समर्थन नहीं करते। उन्होंने कहा कि वह उन अधिकारियों से संपर्क करेंगे, जिनके नाम इस पत्र में डाले गए हैं। इस कथित पत्र में सेना के तीनों अंगों के कई पूर्व प्रमुखों के नाम उल्लिखित हैं जिनमें जनरल रोड्रिज, जनरल दीपक कपूर, जनरल शंकर रॉय चौधरी, एडमिरल रामदास, एडमिरल सुरेश मेहता, एडमिरल अरुण प्रकाश, एडमिरल विष्णु भागवत और एयर चीफ मार्शल एनसी सूरी के नाम शामिल हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि कितने पूर्व अधिकारियों के नाम उनकी सहमति से डाले गए हैं या बिना पूछे।

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