श्रावण मास का अंतिम सोमवार 12 अगस्त को है। सावन का अंतिम सोमवार एक विशेष संयोग के साथ खत्म हो रहा है। 12 अगस्त को त्रयोदशी तिथि होने के कारण सोम प्रदोष व्रत का संयोग बन रहा है, जो भगवान शिव को बहुत प्रिय है। बता दें कि इससे पहले के तीन सोमवार पर भी खास योग था। पहले और तीसरे सोमवार पर नागपंचमी का बेहद दुर्लभ संयोग बना था। इस खास दिन पर भगवान महादेव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। इसके बाद शिवलिंग का गंगा जल से अभिषेक करें और पूरे विधि-विधान से शिवजी का पूजन, अर्चन और स्तवन करना चाहिए। शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, अक्षत, सफेद फूल, धूप, सफेद चंदन अर्पित करें। प्रसाद में कोई फल या फिर मिठाई जरूर चढ़ाएं। इसके बाद रुद्राक्ष की माला के साथ महामृत्युंजय का जाप करें। फिर शिव चालीसा का पाठ करें।