हाईकोर्ट ने कहा है कि पत्नी द्वारा पति के खिलाफ एफआइआर दर्ज करवाना मानसिक प्रताड़ना नहीं है।

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा है कि पत्नी द्वारा पति के खिलाफ एफआइआर दर्ज करवाना मानसिक प्रताड़ना नहीं है। ऐसी एफआइआर को तलाक का आधार नहीं माना जा सकता है। दांपत्य संबंधों में खटास के चलते लगभग 14 वर्षों से अलग रह रहे दंपती के तलाक को हाईकोर्ट ने रद कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा है कि पत्नी द्वारा पति के खिलाफ एफआइआर दर्ज करवाना मानसिक प्रताड़ना नहीं है।14 साल से अलग रह रहे दंपती का तलाक रद किया हाईकोर्ट ने

कुलविंदर रानी ने लुधियाना अदालत द्वारा 21 जनवरी, 2016 को उनके खिलाफ जारी किए तलाक के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। जिला अदालत ने कुलविंदर द्वारा अपने पति और उनके पिता के खिलाफ 2004 में एफआइआर दर्ज करवाने को पति और उसके परिजनों के खिलाफ मानसिक प्रताडऩा माना था और पति राजिंदर प्रसाद द्वारा तलाक  के लिए दायर याचिका को मंजूरी दे दी थी।

कुलविंदर का विवाह 1998 में राजिंदर से हुआ था और साल 2002 में उनका एक पुत्र भी हुआ। विवाह के कुछ समय बाद राजिंदर की मां की मौत हो गई थी। इसके कुछ समय बाद राजिंदर पत्नी को लेकर कनाडा गया, वहां  दोनों में मतभेद उभरने पर वे भारत वापस आ गए।

लुधियाना अदालत में तलाक की याचिका में राजिंदर ने कहा था कि पत्नी ने उसके और उनके पिता पर मारपीट और दहेज उत्पीडऩ के आरोपों में झूठी एफआइआर दर्ज करवाई। बाद में जिला अदालत में कुलविंदर द्वारा दर्ज करवाई एफआइआर को गलत पाया गया और दोनों पिता-पुत्र को आरोपमुक्त कर दिया गया।

इस याचिका में राजिंदर ने यह भी कहा था कि उनकी पत्नी जून, 2004 से उनके साथ नहीं रह रही थी। लुधियाना अदालत ने कुलविंदर और उसके भाई द्वारा याचिकाकर्ता के खिलाफ बोगस दस्तावेजों का प्रयोग करने के आरोपों को भी सही पाया था। इसके अलावा कुलविंदर कौर द्वारा अपने पति के नाजायज संबंधों के आरोपों को गलत पाया था।

कुलविंदर के वकील ने अदालत को बताया कि उनके पति ने भी अपनी पत्नी और उनके भाई के खिलाफ 2011 में झूठी एफआइआर दर्ज करवाई थी जिसमें हाल ही में दोनों को बरी किया जा चुका है। हाईकोर्ट के जस्टिस एमएमएस बेदी और जस्टिस अनुपिंदर सिंह ग्रेवाल की खंडपीठ ने लुधियाना अदालत द्वारा पति को दिए गए तलाक के आदेश खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि पत्नी द्वारा पति के खिलाफ एफआइआर दर्ज करवाने को मानसिक प्रताडऩा का आधार नहीं माना जा सकता। इस मामले में यह कार्रवाई दोनों ही पक्षों ने की है।

पति-पत्नी का अलग रहना तलाक का आधार नहीं

पति और पत्नी के लंबे समय से अलग रहने को भी तलाक का आधार मानने से भी कोर्ट ने इन्कार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि टूटा हुआ रिश्ता तलाक का आधार नहीं हो सकता क्योंकि इस मामले में पत्नी अभी भी बच्चे की देखभाल कर रही है। इस बात को भी स्वीकार नहीं किया जा सकता कि वो अपने पति को छोड़ चुकी है।

 

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