औद्योगिक विकास के साथ ही औद्योगिक वन भी स्थापित कर रहा यूपीसीडा

लखनऊ/कानपुर, 20 जुलाई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप शनिवार को प्रदेश भर में सभी विभागों ने ‘पेड़ लगाओ, पेड़ बचाओ’ अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) ने भी अपने औद्योगिक क्षेत्रों में पौधरोपण कर अपनी भूमिका का निर्वहन किया। यूपीसीडा अपनी नवीनतम पहल के माध्यम से औद्योगिक विकास के साथ-साथ पर्यावरणीय स्थिरता के लिए औद्योगिक वन की भी स्थापना कर रहा है। यूपीसीडा ने अपने औद्योगिक क्षेत्रों में 1,80,000 पेड़ लगाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। उल्लेखनीय है कि यूपीसीडा ने 42,000 एकड़ से अधिक में औद्योगिक क्षेत्रों, टाउनशिप्स और औद्योगिक पार्कों को सफलतापूर्वक विकसित किया है, जिसमें 26,000 से अधिक इकाइयां हैं जो लाखों लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार प्रदान कर रही हैं।

मियावाकी तकनीक का किया जा रहा उपयोग

यूपीसीडा औद्योगिक वन स्थापित करने के लिए मियावाकी तकनीक का उपयोग कर रहा है, जो एक जापानी वनरोपण विधि है, जिसे इसकी दक्षता और तेजी से परिणामों के लिए जाना जाता है। इस तकनीक से मियावाकी के जंगल 10 गुना तेजी से बढ़ते हैं और 30 गुना अधिक सघन होते हैं जो पारंपरिक तरीकों की तुलना में 100 गुना अधिक जैव विविधता रखते हैं और 3 वर्ग मीटर जितनी छोटी साइट पर भी बनाए जा सकते हैं। औद्योगिक क्षेत्रों में कई इकाइयां पहले ही मियावाकी तकनीक का उपयोग कर चुकी हैं, जैसे बरेली में बीएल एग्रो इकाई और सूरजपुर में एशियन पेंट्स और केंट आरओ सिस्टम्स। इसी तरह, गाजियाबाद के कविनगर औद्योगिक क्षेत्र में एक हरित पार्क का सक्रिय रूप से रखरखाव किया जा रहा है और मियावाकी तकनीक का उपयोग करके गाजियाबाद में स्वदेशी पॉलीटेक औद्योगिक पार्क में एक विशेष हरित पार्क स्थापित करने की प्रक्रिया जारी है।

औद्योगिक क्षेत्रों को प्रदूषणमुक्त बनाने का प्रयास

यूपीसीडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) मयूर माहेश्वरी ने कहा कि हमारा प्रयास है कि हम सभी औद्योगिक क्षेत्रों में सतत विकास के साथ पर्यावरण को प्रदूषणमुक्त बनाए रखें। हम वृक्षारोपण के लिए छोटी से छोटी बंजर भूमि का भी उपयोग कर रहे हैं। हमारी आगामी योजना के माध्यम से नए औद्योगिक मॉडलों के लिए प्रवेश द्वार पर हरे-भरे भूदृश्य भी शामिल होंगे, जिससे धूल को कम किया जा सकेगा, हमारे श्रमिकों और आस-पास के निवासियों के स्वास्थ्य की रक्षा हो सके और यूपीसीडा औद्योगिक क्षेत्रों में ‘औद्योगिक वन’ (ग्रीन इंडस्ट्रियल फॉरेस्ट) का निर्माण हो सके।

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