जयशंकर के इन देशों की यात्रा से द्विपक्षीय संबंध होंगे और मजबूत

(शाश्वत तिवारी) : भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर युगांडा और मोजम्बिक के साथ भारत के मजबूत द्विपक्षीय संबंधों को और प्रगाढ़ करने के लिए दोनों अफ्रीकी देशों की 10 से 15 अप्रैल तक की यात्रा पर हैं वहीँ उन्होंने बुधवार को युगांडा का दौरा पूरा कर लिया है। अपनी यात्रा के दौरान विदेश मंत्री ने यहाँ के राष्ट्रपति, विदेशी मंत्री, रक्षा मंत्री और वाणिज्यिक मंत्री समेत कई गणमान्य व्यक्तियों से भारत और युगांडा के बीच संबंधों को मजबूत करने की दिशा में काम करने के विषय में मुलाकात की। युगांडा दौरे में जो इवेंट अहम रहे उनमें एक नेशनल फोरेंसिक साइंट यूनिवर्सिटी के कैंपस का उद्घाटन और दूसरा सोलर वाटर पंप प्रोजेक्ट के निर्माण की शुरुआत रही, जिससे युगांडा के 20 जिलों के करीब 5 लाख लोगों को पानी मिलेगा। वहीँ भारत की नेशनल फोरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी का कैंपस युगांडा के जिंजा में खोला जा रहा है।

 

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने युगांडा की राजधानी कंपाला में भारतीय समुदाय से बातचीत भी की उन्होंने ट्वीट कर बताया कि कंपाला में भारतीय समुदाय से बातचीत की। उनके स्वागत की गर्मजोशी से उत्साहित हूं। भारत-युगांडा संबंधों में उनका योगदान हम सभी को गौरवान्वित करता है। एक और ट्वीट में लिखा कि कंपाला में स्वामीनारायण मंदिर जाने का सौभाग्य मिला शांति, स्वास्थ्य और सद्भाव के लिए प्रार्थना की।

 

यात्रा के दौरान विदेश मंत्री डॉ एस. जयशंकर ने युगांडा के जिंजा में राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय के परिसर का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्‍होंने कहा कि यह राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय का पहला विदेशी परिसर है। यह दुनिया का पहला विश्वविद्यालय है जो विशेष रूप से फोरेंसिक विज्ञान को समर्पित है। इसकी स्थापना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गुजरात के अहमदाबाद में हुई थी। उन्होंने कहा यह विश्वविद्यालय फोरेंसिक विज्ञान, व्यवहार विज्ञान, साइबर सुरक्षा, डिजिटल फोरेंसिक और संबद्ध विज्ञान में पाठ्यक्रम संचालित करता है और इन क्षेत्रों में अनुसंधान को भी बढ़ावा देता है। डॉ. जयशंकर ने कहा कि भारत और युगांडा के बीच मजबूत रक्षा संबंध हैं। भारत अपने आर्थिक और तकनीकी सहयोग कार्यक्रम के तहत युगांडा पीपुल्स डिफेंस फोर्स’-यूपीडीएफ  के साथ नियमित रूप से प्रशिक्षण और आदान-प्रदान करता रहा है। हर साल लगभग 50 यूपीडीएफ अधिकारी छोटी अवधि के महीनों से लेकर एक साल तक के रक्षा पाठ्यक्रम  के लिए भारत की यात्रा करते हैं।

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