दवा ही नहीं, अब समंदर भी कर रहा है मेंटल हेल्थ का इलाज!

विश्व स्वास्थ्य संगठन की भाषा में मेंटल हेल्थ को समझें तो एक मानसिक रूप से सेहतमंद इंसान अपनी क्षमता को जानता है, रोजाना के तनाव को झेल सकता है और प्रोडक्टिविटी के साथ काम भी कर सकता है। पर लोगों की मानसिक स्थिति दिन-ब-दिन कमजोरी होती जा रही है, तभी तो इन दिनों ट्ब्लू स्पेस जैसी थेरेपी भी दवा की तरह काम कर रही हैं। आइए जानते हैं आखिर क्या है ब्लू स्पेस थेरेपी और क्यों इसे मेंटल हेल्थ से जोड़कर देखा जा रहा है। 

क्या है ब्लू स्पेस थेरेपी? 

मेंटल हेल्थ से जुड़े मामले डिजिटल दौर में तेजी से बढ़ रहे हैं, इससे पहले तो किसी ने डिप्रेशन, अकेलेपन और एंग्जायटी जैसी बीमारियों के नाम सुने भी नहीं थे। लेकिन अब हर कोई इन नामों को जानने के साथ-साथ इनके बुरे अनुभव से भी गुजर रहा है। इसी वजह से ब्लू स्पेस थेरेपी ट्रेंड में है जिसके नाम से थोड़ा बहुत आयडिया तो लग ही गया होगा। यहां ब्लू स्पेस से मतलब पानी से जुड़ी चीजों से है, जैसे- झील, नदी और समंदर। 

कई रिपोर्ट्स में यह बात निकलकर सामने आई है कि ब्लू स्पेस के ज्यादा संपर्क में रहने से मेंटल हेल्थ अच्छी रहती है। रिपोर्ट्स तो यह भी बताती है कि तटीय इलाकों में रहने वाले और वहां जाने वाले लोगों में साइकोलॉजिकल डिस्ट्रेस यानी मेंटल हेल्थ से जुड़ी परेशानियां बहुत कम देखी गई। 

किताब ने भी किया साबित 

साल 2014 में मरीन बायोलॉजिस्ट वालेस जे. निकोलस की किताब ब्लू माइंड आई थी, इस किताब में भी यह साबित किया गया था कि पानी के आसपास रहने से स्ट्रेस हॉर्मोन कोर्टिसोल कम होता है और व्यक्ति खुद को लेकर पॉजिटिव महसूस करने लगता है। 

पानी के अंदर थेरेपी

वैसे तो ब्लू स्पेस थेरेपी पानी के आसपास रहने से दिखने वाले पॉजिटिव बदलावों की बात करती है, पर अब इसके फायदों को देखते हुए पानी के अंदर भी इस थेरेपी को दिया जाने लगा है। विदेशों में डिप्रेशन, ट्रॉमा और नशे की लत जैसी दिक्कतों को दूर करने के लिए स्कूबा और फ्री-डाइविंग, वेटलेसनेस के अनुभव, ब्रीदवर्क के साथ मेडिटेशन जैसी थेरेपी लोगों को दी जा रही हैं। इसमें वेटलेसनेस का एहसास सबसे खास है जो नर्वस और ब्रेन सिस्टम को दोबारा से रेगुलेट करने में मदद करता है। 

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