बांग्लादेश में अगर जमात-ए-इस्लामी सत्ता में आई तो कैसे होंगे भारत के साथ संबंध?

बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी प्रमुख डॉ. शफीकुर रहमान का भारत-बांग्लादेश संबंधों पर दिया गया बयान वायरल हो गया है। सत्ता में आने पर भारत से रिश्तों पर पूछे जाने पर उन्होंने इसे ‘रंगीन’ बताया। यह टिप्पणी जमात के पारंपरिक भारत विरोधी रुख में बदलाव का संकेत हो सकती है। पार्टी ने अपने चुनावी घोषणापत्र में भारत सहित पड़ोसी देशों से सहयोगात्मक संबंध बनाने का आह्वान किया है और हाल ही में अपनी छवि सुधारने के प्रयास किए हैं।

बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख डॉ. शफीकुर रहमान का भारत के साथ संबंधों पर दिया गया एक बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।

दरअसल, एक पत्रकार ने सवाल किया कि अगर जमात सत्ता में आती है तो बांग्लादेश के भारत के साथ किस तरह के संबंध होंगे? इसके जवाब में जमात प्रमुख हरे, चमकते हुए लाइट्स की ओर इशारा करते हुए कहते हैं, “जब भारत के साथ संबंधों की बात आती है तो क्या आप देख सकते हैं कि यह कितना रंगीन है।” इतना कहकर वह हंसते हुए वहां से चले जाते हैं।

क्या हैं इस टिप्पणी के मायने?
हालांकि, यह टिप्पणी रहस्यमयी है। इसे जमात के अंदर इस बात का एहसास माना जा रहा है कि पाकिस्तान समर्थक और भारत विरोधी रुख बांग्लादेश के हित में काम नहीं आए हैं।

बांग्लादेश में शेख हसीना का तख्तापलट होने के बाद भारत के साथ रिश्ते खराब हो गए हैं। इस बीच रहमान की यह टिप्पणी शायद पहला संकेत है कि जमात भारत के साथ बेहतर रिश्ते बनाने को तैयार है।

हालांकि, जमात ने हसीना को वहां रहने देने के लिए अक्सर भारत को निशाना बनाया है और जमात के कई हमदर्दों ने अक्सर भारत के उत्तर-पूर्व को निशाना बनाने की बात कही है।

लेकिन हाल के दिनों में जमात की टॉप लीडरशिप ने अपनी बयानबाजी थोड़ी कम कर दी है। शफीकुर रहमान ने पहले दावा किया था कि दिसंबर 2025 में एक भारतीय डिप्लोमैट उनसे मिला था।

चुनावी घोषणा पत्र में संबंध सुधारने पर जोर
आने वाले चुनावों के लिए अपने घोषणापत्र में बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी ने आपसी सम्मान और निष्पक्षता के आधार पर भारत, भूटान, नेपाल, म्यांमार, श्रीलंका, मालदीव और थाईलैंड सहित पड़ोसी देशों के साथ शांतिपूर्ण और सहयोगात्मक संबंधों का आह्वान किया है।

पाकिस्तान समर्थक है जमात
जमात एक पाकिस्तान समर्थक, कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन है। अतीत में यह पार्टी अपने भारत विरोधी रुख के लिए जानी जाती रही है और इसके कई नेताओं या सहयोगियों ने भारत विरोधी बयान दिए हैं। हालांकि, जमात ने हाल के दिनों में हिंदुओं के साथ मेलजोल बढ़ाकर अपनी छवि सुधारने की कोशिश की है।

इसने हिंदू बहुल निर्वाचन क्षेत्र में एक हिंदू उम्मीदवार को भी मैदान में उतारा है। भारत ने बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ अत्याचारों का मुद्दा बार-बार उठाया है।

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