भारतीय मूल की तुलसी गाबार्ड का राष्ट्रपति पद की दौड़ से बाहर होना लगभग तय

लॉस एंजेल्स : हिंदू अमेरिकन डेमोक्रेट तुलसी गाबार्ड का राष्ट्रपति पद की दौड़ से बाहर होना तक़रीबन तय है। भारतीय अमेरिकी नागरिकों में अत्यधिक लोकप्रिय और राष्ट्रपति पद की दौड़ के लिए संभावित डेमोक्रेट उम्मीदवारी में तुलसी गाबार्ड अपेक्षित मतदाता संख्या और चुनाव मैदान में बने रहने के लिए छोटे छोटे चंदे देने वालों की अपेक्षित संख्या का जुगाड़ करने में सफल नहीं हो पा रही हैं। तुलसी हवाई द्वीप से कांग्रेस के प्रतिनिधि सभा की सांसद हैं और नेशनल कोस्ट गार्ड में वरिष्ठ अधिकारी हैं। तुलसी को 18 दिसम्बर को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के विरुद्ध प्रतिनिधि सभा में महाभियोग में मतदान के समय डेमोक्रेट होते हुए पक्ष अथवा विपक्ष में वोट न देकर मात्र उपस्थिति दर्ज कराए जाने के निर्णय पर भारी समर्थन मिला था।

तुलसी गाबार्ड को प्रारंभ में भारतीय अमेरिकी मतदाताओं और दान दाताओं से बड़ा सहयोग मिला। मौजूदा जानकारी के अनुसार पहली तिमाही में तुलसी को भारतीय अमेरिकी नागरिकों से दो लाख चालीस हज़ार डालर तथा एशियाई समुदाय से कुल मिला कर तीन लाख नब्बे हज़ार डालर चंदे के रूप में मिले थे। तत्पश्चात तुलसी की सफलताओं के आधार पर 65 लाख डालर मिले थे, जिसमें 23 लाख डालर बड़ी चंदे की रक़म थी। इस चंदे की रक़म में बड़े चंदे की रक़म के साथ साथ फ़ुटकर में छोटी-छोटी रक़म का उतना ही महत्व है, जो मतदाताओं में एक उम्मीदवार की पहुंच को अभिव्यक्त करता है। इस लक्ष्य में 19 दिसम्बर को हुई डिबेट में भाग लेने वाले संभावित उम्मीदवारों में बर्नी सैंडर्स सात करोड़ 43 लाख डालर चंदे की रक़म जोड़ कर सब से आगे रहे। इसमें से छह करोड़ चौदह लाख डालर फ़ुटकर राशि थी। इनके अलावा एलिज़ाबेथ वारेन को चार करोड़ नब्बे लाख डालर सहित छह करोड़ डालर मिले।

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