लखनऊ छावनी में मनाया गया सशस्त्र भूतपूर्व सैनिक दिवस 

लखनऊ:  सूर्या कमान के तत्वाधान में लखनऊ छावनी में 9वां सशस्त्र भूतपूर्व सैनिक दिवस बड़े हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस कार्यक्रम में लगभग 800 पूर्व सैनिकों की उपस्थिति रही जो सशस्त्र बलों में उनके विश्वास और समाज के साथ उनके मजबूत संबंध का प्रतीक है। इस कार्यक्रम में मध्य कमान के जीओसी-इन-सी (जनरल अफसर कमांडिंग-इन-चीफ) लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता और स्टेशन से बड़ी संख्या में सेवारत अधिकारी उपस्थित थे। समारोह में अपने पूर्व सैनिकों को सम्मानित करने और सेवारत कर्मियों और वेटरन्स समुदाय के बीच एक मजबूत बंधन को बढ़ावा देने के प्रति भारतीय सेना की अटूट प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला ।

समारोह की शुरुआत मध्य कमान के युद्ध स्मारक “स्मृतिका” पर पुष्पांजलि समारोह के साथ हुई। मध्य कमान के जीओसी-इन-सी लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता ने वरिष्ठ पूर्व सैनिकों के साथ उन शहीद वीरों को श्रद्धांजलि अर्पित की जिन्होंने राष्ट्र की सेवा में अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। इस दौरान सूर्या ऑडिटोरियम में पूर्व सैनिकों को सम्मानित करने लिए एक समारोह आयोजित किया गया। राष्ट्र और समाज में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए दस प्रतिष्ठित पूर्व सैनिकों को उनके उत्कृष्ट उपलब्धि के लिए सम्मानित किया गया। पूर्व सैनिकों के लिए की गई विभिन्न कल्याणकारी पहलों पर भी उन्हें जानकारी दी गई। साथ ही अनुभव, अनुशासन और सेवा-उन्मुख लोकाचार के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में पूर्व सैनिकों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।

इस दौरान सूर्या ऑडिटोरियम में लेफ्टिनेंट कर्नल हेम लोहुमी, कर्नल दुष्यंत सिंह, कर्नल आशुतोष मिश्रा (सेवानिवृत्त), स्क्वाड्रन लीडर राखी अग्रवाल, स्क्वाड्रन लीडर अभय प्रताप सिंह (सेवानिवृत्त), कर्नल बीकेडी बैजल, सूबेदार मेजर ऋषि दीक्षित (सेवानिवृत्त), सूबेदार (मानद कैप्टन) ) इंदल सिंह (सेवानिवृत्त), नायक कमलेश कुमार पांडे (सेवानिवृत्त) और सूबेदार राजकुमार सिंह (सेवानिवृत्त) को राष्ट्र और समाज में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए ‘उत्कृष्ट उपलब्धि पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। साथ ही अनुभव, अनुशासन और सेवा-उन्मुख लोकाचार के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में पूर्व सैनिकों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।

लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता ने पूर्व सैनिकों के साथ बातचीत की, उनकी शिकायतों को संबोधित किया और सुझाव लिए। उन्होंने पूर्व सैनिकों को अपने पूर्व सैनिकों का कल्याण सुनिश्चित करने के लिए सशस्त्र बलों की प्रतिबद्धता का आश्वासन दिया।

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