10 या 15%, कितने बढ़ेंगे फ्लाइट टिकट के दाम

अमेरिका और ईरान (Iran-US War) के बीच जारी जंग पश्चिम एशिया समेत पूरी दुनिया के लिए परेशानी का सबब बनती जा रही है। दरअसल, इस युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल आ रहा है और यह महंगाई बढ़ने का सबसे बड़ा कारण होगा। क्रूड के महंगे (Crude Prices) होने से हवाई सफर भी महंगा हो सकता है। क्योंकि ग्लोबल ऑयल की बढ़ती कीमतें के चलते ‘एविएशन टरबाइन फ्यूल’ (ATF) की लागत बढ़ सकती है , जो एयरलाइन कंपनियों के लिए सबसे बड़ा खर्च है। ऐसे में इसका असर फ्लाइट टिकटों की कीमतों पर देखने को मिल सकता है।

अगर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल जारी रहता है तो भारतीय एयरलाइंस को लागत का कुछ हिस्सा यात्रियों पर डालना पड़ सकता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दोनों किरायों में वृद्धि हो सकती है। चूंकि, अब समर सीजन आने वाला है इसलिए छुट्टियों पर जाने वाले लाखों यात्रियों को ज्यादा जेब ढीली करनी पड़ सकती है।

’10-15% की बढ़ोतरी संभव’
मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, रैवल प्लेटफॉर्म वंडरऑन के सीईओ गोविंद गौर ने कहा, “अगर स्थिति यही बनी रहती है और ईंधन की लागत बढ़ती रहती है तो घरेलू हवाई किराए में लगभग 10-15 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है।” उन्होंने यह भी कहा कि एयरस्पेस बंद होने और उड़ानों के रद्द होने के कारण फिलहाल अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर किराए में भारी वृद्धि देखी जा रही है। वहीं, घरेलू मार्गों पर भी हवाई किराए में वृद्धि के शुरुआती संकेत मिल रहे हैं, खासकर दिल्ली-मुंबई, बेंगलुरु-दिल्ली और मुंबई-हैदराबाद जैसे ज्यादा डिमांड वाले रुट्स पर।”

28 फरवरी को जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले शुरू किए, तब से बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमतें लगभग 72.48 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर लगभग 80 डॉलर तक पहुंच गई है। ‘फेडरेशन ऑफ एविएशन इंडस्ट्री इन इंडिया’ की एविएशन कार्गो चेयरपर्सन डॉ. वंदना सिंह ने कहा कि एटीएफ एयरलाइंस के ऑपरेशनल खर्चों का लगभग 30-40 प्रतिशत हिस्सा होता है और यह हवाई किराए की संरचना का लगभग 45 प्रतिशत तक हो सकता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों का बढ़ना एयरलाइन कंपनियों की मुश्किल बढ़ा देता है।

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