कंपनी के CEO की मौत, पासवर्ड पता न होने से 1300 करोड़ के बिटकॉइन फंसे

 कनाडा की बड़ी क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज फर्म के सीईओ और को-फाउंडर की मौत के बाद निवेश्कों के 190 मिलियन डॉलर (1300 करोड़ रुपये) फंस गए हैं. बताया जा रहा है कि क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज फर्म क्वाड्रिगा सीएक्स के सीईओ गेराल्ड कोटेन (30) की मौत से 1300 करोड़ रुपये के बिटकॉइन समेत अन्य डिजीटल करेंसी फ्रीज हो गई है. इस करेंसी को अनलॉक करने का पासवर्ड सिर्फ कोटेन के पास ही था. मीडिया रिपोर्टस में बताया जा रहा है कि दिसंबर के अंत में भारत दौरे पर आने के दौरान कोटेन की मौत हो गई. एक सप्ताह पहले क्वाड्रिगा सीएक्स ने कनाडा की अदालत में क्रेडिट प्रोटेक्शन के लिए अपील की तो हजारों करोड़ की क्रिप्टोकरेंसी लॉक होने की जानकारी सामने आई.

मृतक की पत्नी को भी नहीं पता पासवर्ड
सीएनएन की खबर के अनुसार क्रिप्टोकरेंसी के पासवर्ड के बारे में मृतक की पत्नी को भी जानकारी नहीं है. दिग्गज सिक्योरिटी एक्सपर्ट भी इस करेंसी के पासवर्ड को ब्रेक नहीं कर पा रहे हैं. खबरों में बताया जा रहा है कि गेराल्ड कोटेन की मौत दिसंबर 2018 के अंत में आंत से जुड़ी बीमारी के कारण हुई है. कंपनी ने कोटेन की मौत की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से दी. यह भी बताया गया कि वह भारत यात्रा पर अनाथ बच्चों के लिए एक अनाथालय खोलने गए थे.

कोटेन का लैपटॉप इनक्रिप्टेड
कोटेन की मौत के बाद उसकी पत्नी जेनिफर रॉबर्टसन और उनकी कंपनी ने पिछले दिनों अदालत में क्रेडिट प्रोटेक्शन की याचिका दायर की. याचिका में रॉबर्टसन की तरफ से कहा गया कि गेराल्ड के इनक्रिप्टेड अकाउंट को अनलॉक नहीं कर पा रहे हैं. इस अकाउंट में करीब 190 मिलियन डॉलर की बिटकॉइन समेत अन्य क्रिप्टोकरेंसी लॉक्ड हैं. यह भी बताया गया कि गेराल्ड जिस लैपटॉप से अपना ऑफिशियल काम करते थे, वह इनक्रिप्टेड है और उसका पासवर्ड उनके अलावा किसी के पास नहीं था.

कंपनी ने एक बयान में कहा कि पिछले दिनों में हमने अपनी आर्थिक परेशानी का हल निकालने के लिए तमाम कोशिशें की हैं. हमने क्रिप्टोकरेंसी अकाउंट का पता लगाने और उसे सुरक्षित करने की भी कोशिश की है. हमें अपने ग्राहकों को उनके डिपॉजिट के हिसाब से पैसा देना है लेकिन हम ऐसा कर पाने में असमर्थ हैं. 31 जनवरी 2019 को क्वाड्रिगा सीएक्स ने अपनी वेबसाइट के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट से अपील की कि उन्हें अनुमति दी जाए, जिससे वह अपनी आर्थिक समस्या को हल कर सकें.

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