बिना अनुमति के खर्च दिये 1157 करोड़!

सीएजी ने संसद में पेश की रिपोर्ट, लगाई फटकार

नई दिल्ली : भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) ने मंगलवार को संसद में पेश अपनी रिपोर्ट में मंत्रालयों द्वारा बड़ी मात्रा में लेखा में की गई वित्तीय अनुशासनहीनता को लेकर फटकार लगाई। सीएजी ने 11801 करोड़ रुपये के व्यय/प्राप्ति को लघु शीर्ष में रखने, शिक्षा उपकर(सेस) के द्वारा अबतक संग्रहित किए 94036 करोड़ रुपये के नियोजन, बिना संसद के पूर्व अनुमोदन के 1156.80 करोड़ रुपये का अधिक व्यय करने, गुप्तव्यय के नाम पर खर्च की अनुमति देने जैसे मामलों को लेकर अपनी आपत्ति जताई। वहीं रियल स्टेट से जुड़ी करीब 95 प्रतिशत कंपनियों के पास या तो स्थाई खाता संख्या(पैन) नहीं है या फिर रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज(आरओसी) को इसकी जानकारी नहीं होने पर नाराजगी जताई। मंगलवार को भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक(सीएजी) ने संसद में वर्ष 2017-18 का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। जिसमें साफ तौर पर कहा कि 36 मुख्य शीर्षों में कुल 11 हजार 801 करोड़ रुपये के कुल व्यय और प्राप्तियों के आधे से अधिक को लघु शीर्ष-800 के अंतर्गत दर्ज किया गया है, जिससे मंत्रालयों की ऑडिट रिपोर्ट में अपादर्शिता झलकती है।

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि कुल 54,578 कंपनियों का डेटा लेखा परीक्षक को उपलब्ध कराया गया था। इसमें से आरओसी के पास 51,670 कंपनियां(95 प्रतिशत) की पेन जानकारी नहीं थी। लेखा परीक्षा पेन की जानकारी हासिल कर यह निश्चित करना चाहता था कि यह कंपनियां आयकरदाता हैं या नहीं। उल्लेखनीय है कि भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक(सीएजी) ने मंगलवार को वर्ष 2017-18 के प्रतिवेदन को संसद के दोनों सदन, लोकसभा एवं राज्यसभा में प्रस्तुत किया। प्रतिवेदन में मार्च,2018 को समाप्त हुए वर्ष के लिए संघ सरकार के वित्त लेखे तभा विनियोग लेखे की नमूना लेखापरीक्षा से मामलों को शामिल किया गया है। सीएजी यह प्रतिवेदन संविधान के अनुच्छेद-151 के तहत राष्ट्रपति को प्रस्तुत करने के लिए तैयार करता है। मंत्रालयों की ऑडिट रिपोर्ट्स भी सीएजी अलग से तैयार करता है।

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