जानिए होलाष्टक की पौराणिक कथा

आप सभी को बता दें कि जल्द ही होली का त्यौहार आने वाला है ऐसे में उसके पहले होलाष्टक मनाया जाएगा जो 13 मार्च से शुरू होकर 20 मार्च तक रहेगा. ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं होली की एक प्रामाणिक कथा के बारे में जिसे सुनकर आप हैरान रह जाएंगे.

इस कथा के अनुसार हिमालय पुत्री पार्वती चाहती थीं कि उनका विवाह भगवान भोलेनाथ से हो जाए परंतु शिवजी अपनी तपस्या में लीन थे. तब कामदेव पार्वती की सहायता के लिए को आए. उन्होंने प्रेम बाण चलाया और भगवान शिव की तपस्या भंग हो गई. शिवजी को बहुत क्रोध आया और उन्होंने अपनी तीसरी आंख खोल दी. कामदेव का शरीर उनके क्रोध की ज्वाला में भस्म हो गया.

फिर शिवजी ने पार्वती को देखा. पार्वती की आराधना सफल हुई और शिव जी ने उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार कर लिया. इसीलिए पुराने समय से होली की आग में वासनात्मक आकर्षण को प्रतीकत्मक रूप से जला कर अपने सच्चे प्रेम का विजय उत्सव मनाया जाता है.जिस दिन भगवान शिव ने कामदेव को भस्म किया था वह दिन फाल्गुन शुक्ल अष्टमी थी. तभी से होलाष्टक की प्रथा आरंभ हुई.

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