सुमित्रा महाजन ने किया ऐलान, नहीं लड़ूंगी चुनाव!

नई दिल्ली/ इंदौर : लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने आम चुनाव-2019 लड़ने से इनकार कर दिया। महाजन ने शुक्रवार को इसकी आधिकारिक घोषणा कर दी। अपने आधिकारिक लेटर हेड पर ये एलान करते हुए सुमित्रा महाजन ने कहा कि भाजपा ने आज तक इंदौर में अपना उम्मीदवार घोषित नहीं किया है। यह अनिर्णय की स्थिति क्यों हैं? संभव है कि पार्टी को निर्णय लेने में कुछ संकोच हो रहा है। हालांकि मैने पार्टी में वरिष्ठों से इस सन्दर्भ में बहुत पहले ही चर्चा की थी और निर्णय उन्ही पर छोड़ा था। लगता है उनके मन में अब भी कुछ असमंजस है। इसीलिए मैं यह घोषणा करती हूं कि मुझे अब लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ना है, अत: पार्टी अपना निर्णय मुक्त मन से करें, नि:संकोच करे।
सुमित्रा महाजन ने आगे लिखा कि इंदौर के लोगों ने आज तक जो मुझे प्रेम दिया, भारतीय जनता पार्टी तथा सभी कार्यकर्ताओं ने जिस लगन से सहयोग दिया और जिन-जिन लोगों ने मुझे आज तक सहयोग किया, उन सभी की मैं हृदय से आभारी हूं। अपेक्षा करती हूं कि पार्टी जल्द ही अपना निर्णय करे, ताकि आने वाले दिनों में सभी को काम करने में सुविधा होगी तथा असमंजस की स्थिति समाप्त होगी। वैसे पहले से ही कयास लगाए जा रहे थे कि इस बार सुमित्रा महाजन का टिकट कट सकता है। ये बात और मजबूत होती इसीलिए भी दिखी, क्योंकि भाजपा ने मध्य प्रदेश के कई लोकसभा क्षेत्रों से अपने उम्मीदवारों की घोषणा तो कर दी थी लेकिन इंदौर सीट से उम्मीदवार घोषित नहीं किया। सुमित्रा महाजन पिछली 8 बार से मध्य प्रदेश की इंदौर लोकसभा सीट से चुनाव जीत रही थीं।
महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले के चिपलून में जन्मी सुमित्रा महाजन विवाह होकर 1965 में इंदौर आई थी। 1982 में पहली बार वो चुनावी राजनीति में आईं। इंदौर नगर-निगम में पार्षद का चुनाव जीतीं। अगली बार वे दोबारा पार्षद बनीं और इंदौर की उप-महापौर चुनी गईं। 1989 में राम मंदिर लहर में भाजपा ने उन्हें इंदौर से अपना उम्मीदवार बनाया था। तब सुमित्रा महाजन ने तत्कालीन कद्दावर कांग्रेस नेता और केंद्रीय मंत्री रहे प्रकाशचंद्र सेठी को हराया था। उसके बाद से सुमित्रा महाजन लगातार आठ बार संसदीय चुनाव जीतती रहीं। वे कभी लोकसभा चुनाव नहीं हारीं और साल 2014 में लोकसभा स्पीकर बनाई गईं। अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री रहते हुए वे एनडीए-1 की सरकार में मानव संसाधन, संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय में केंद्रीय राज्यमंत्री रहीं।

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