आर्कटिक पर कब्ज़ा करना चाह रहे चीन और रूस, अमेरिका ने दी चेतावनी

अमेरिका ने सोमवार को कहा है कि वो आर्कटिक में रूस और चीन के ‘आक्रमक रवैये’ पर अंकुश लगाने के लिए संसाधन से समृद्ध क्षेत्र में अपनी उपस्थिति मजबूत करने की योजना बना रहा है। उत्तरी फिनलैंड के रोवानेमी में अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने चेताते हुए कहा है कि अपने तेल, गैस, खनिज पदार्थ और मछलियों के जखीरे के कारण ‘ यह इलाका वैश्विक शक्ति और होड़’ का केंद्र बन चुका है।

पोम्पिओ ने कहा है कि आर्कटिक एक बीहड़ इलाका है और इसका मतलब यह नहीं है कि इसे ऐसी जगह बना दिया जाए जहां कोई कानून-कायदा ही न हो। आर्कटिक परिषद के आठ सदस्यों द्वारा की गई बैठक की पूर्व संध्या पर पोम्पिओ ने चीन और रूस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अन्यत्र क्षेत्रों में चीन की आक्रमकता हमें बताएगी कि वह आर्कटिक में कैसा वर्ताव करेगा।

पोंपिओ ने सवाल किया कि, ‘‘ क्या हम चाहते हैं कि आर्कटिक सागर नया दक्षिण चीन सागर में बदल जाए जहां का सैन्यीकरण हो और क्षेत्रीय दावों की होड़ लगी रहे?’’ अमेरिका और रूस आर्कटिक परिषद के मेंबर हैं जबकि चीन के पास मात्र पर्यवेक्षक का दर्जा है। पोंपिओ के अनुसार , चीन ने क्षेत्र में 2012-2017 के मध्य 90 अरब डॉलर का निवेश किया है और उसका मकसद उत्तरी समुद्री मार्ग का पूरा फायदा लेने का है।

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