चातुर्मास में विष्णु की आराधना से मिलती है पापों से मुक्ति -महामंडलेश्वर

महादेव को प्रसन्न करने का रुद्राभिषेक रामबाण उपाय

गाजीपुर : चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु की आराधना करने मात्र से सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है। इसके अलावा गुरुवार को उपवास और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ किया जाना भी लाभप्रद होता है। उक्त बातें महामंडलेश्वर स्वामी भवानीनन्दन यति जी महाराज ने सिद्धपीठ हथियाराम मठ पर चल रहे चातुर्मास व्रत के दौरान शुक्रवार को उन्होंने प्रकाश डालते हुए कहा। उन्होंने कहाकि स्कंदपुराण के अनुसार संसार में मनुष्य जन्म और विष्णु भक्ति दोनों ही दुर्लभ है लेकिन चार्तुमास में भगवान विष्णु का व्रत करने वाला मनुष्य ही उत्तम एवं श्रेष्ठ माना गया है। चौमासे के इन चार मासों में सभी तीर्थ, दान, पुण्य और देव स्थान भगवान विष्णु जी की शरण लेकर स्थित होते हैं तथा चातुर्मास में भगवान विष्णु को नियम से प्रणाम करने वाले का जीवन भी शुभफलदायक बन जाता है। गौरतलब हो कि महामंडलेश्वर जी द्वारा प्रत्येक वर्षों की भांति इस वर्ष भी चातुर्मास महाव्रत का पालन किया जा रहा है, लेकिन वैश्विक महामारी कोरोना कोविड के कारण श्रद्धालुओं की सामुहिक उपस्थिति पर रोक लगाते हुए सीमित संख्या में ही प्रवेश प्राप्त हो पा रहा है।

श्री यति चातुर्मास महाव्रत के दौरान सिद्धपीठ पर चल रहे रुद्राभिषेक महायज्ञ के दौरान उन्होंने कहाकि रुद्राभिषेक कर शिव से मनचाहा वरदान पाया जा सकता है। शिव के रुद्र रूप को अभिषेक बहुत प्रिय है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव सबसे सरल उपासना से भी प्रसन्न होते हैं लेकिन रुद्राभिषेक उन्हें सबसे अधिक प्रिय है। उन्होंने कहाकि रुद्राभिषेक से शिवजी को प्रसन्न कर असंभव को भी संभव करने की शक्ति पा सकते हैं। ऐसे में रुद्राभिषेक करके सरलता पूर्वक शिव कृपा के भागी बन सकते हैं। रुद्र भगवान शिव का ही प्रचंड रूप हैं। शिवजी की कृपा से सारे ग्रह, बाधाओं और सारी समस्याओं का नाश होता है। शिवलिंग पर मंत्रों के साथ विशेष चीजें अर्पित करना ही रुद्राभिषेक कहा जाता है। वैदिक विद्वानों द्वारा रुद्राभिषेक में शुक्ल यजुर्वेद के रुद्राष्टाध्यायी के मंत्रों का पाठ के साथ सावन में रुद्राभिषेक करना ज्यादा शुभ होता है।

महामंडलेश्वर ने कहा कि भगवान शिव बहुत ही सरलता से प्रसन्न होने वाले भगवान हैं। इनके इन्हीं स्वभाव के चलते इन्हें भोलेनाथ कहते हैं। रुद्राभिषेक कोई भी कष्ट या ग्रहों की पीड़ा दूर करने का सबसे सरल उपाय है। गौरतलब हो कि चातुर्मास व्रत के तहत मिट्टी के बने द्वादश पार्थिव ज्योतिर्लिंगों पर देवभूमि उत्तराखंड से आये प्रकांड वैदिक विद्वान बालकृष्ण पांथरी के आचार्यत्व में चल रहे रुद्राभिषेक महायज्ञ में श्री पांथरी ने बताया कि इस बार श्रावण मास की शुरुआत सोमवार से हो रही है और सावन का समापन भी सोमवार से ही हो रहा है।

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