GDP में ऐतिहासिक गिरावट के बाद आई अच्छी खबर, नए ऑर्डर मिलने से देश की मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ बढ़ी

देश की आर्थिक सुस्ती (Indian Economy) दूर होने के संकेत मिलने लगे है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, नए ऑर्डर्स मिलने के चलते भारत में मैन्‍युफैक्‍चरिंग एक्टिविटी (Indian Manufacturing Activity) के आंकड़ों में तेजी आई है. IHS Markit की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत का अगस्त में पीएमआई (PMI-India’s purchasing managers’ index ) बढ़कर 52 पर पहुंच गया है. इससे पहले महीने यानी जुलाई में ये 46 पर था. पांच महीने में पहली बार इसमें ग्रोथ आई है. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि पीएमआई का 50 के ऊपर रहना एक अच्छा संकेत है. आने वाले दिनों में आंकड़े और बेहतर हो सकते हैं.

आपको बता दें कि कोरोना (Coronavirus) के कारण मौजूदा वित्त वर्ष की अप्रैल से जून तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 23.9 फीसदी की रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई है.

कैसे लौटी ग्रोथ-आईएचएस मार्किट की अर्थशास्त्री श्रेया पटेल का कहना है कि भारतीय विनिर्माण क्षेत्र की सेहत में सकारात्मक सुधार आया है. यह संकेत जून तिमाही में गिरावट से उबरने की ओर है. उन्होंने कहा, ‘घरेलू बाजारों की मांग में तेजी से उत्पादन और इनपुट खरीदारी में ग्रोथ आई. हालांकि, अगस्त में सब कुछ अच्छा रहा है. ऐसा नहीं है. नौकरियां का संकट अभी बना हुआ है.’

इससे अब क्या होगा- एसकोर्ट सिक्योरिटी के रिसर्च हेड आसिफ इकबाल का कहना हैं कि, पीएमआई आंकड़ों में आया सुधार, भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत हैं. हालांकि, इसकी उम्मीद पहले से लगाई जा रही थी, क्योंकि दिसंबर में भी मैन्‍युफैक्‍चरिंग एक्टिविटी बढ़ती हुई नज़र आई.

क्या होता हैं पीएमआई – (What is PMI Manufecting)- अगर आसान शब्दों में कहें तो पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्‍स (PMI), मैन्‍युफैक्‍चरिंग सेक्‍टर की आर्थिक सेहत को मापने का एक इंडिकेटर है. इसके जरिए किसी देश की आर्थिक स्थिति का आकलन लगाया जाता है. मैन्युफैक्चरिंग के अलावा, सर्विस सेक्टर के लिए पीएमआई आंकड़े जारी होते हैं. दुनिया के सभी देशों की तुलना एक जैसे मापदंड से होती है.

पीएमआई आंकड़ों में 50 को आधार माना गया है. साथ ही इसको जादुई आंकड़ा भी माना जाता है. 50 से ऊपर के पीएमआई आंकड़े को कारोबारी गतिविधियों के विस्तार के तौर पर देखा जाता है.

जबकि 50 से नीचे के आंकड़े को कारोबारी गतिविधियों में गिरावट के तौर पर देखा जाता है. यानी 50 से ऊपर या नीचे पीएमआई आंकड़ों में जितना अंतर होगा, कारोबारी गतिविधि में क्रमश: उतनी ही वृद्धि और कमी मानी जाएगी.

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