#Me Too : एमजे अकबर मामले में प्रिया रमानी के खिलाफ मानहानि का आरोप तय

प्रिया रमानी ने सभी आरोपों से किया इनकार

नई दिल्ली : दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और पत्रकार एमजे अकबर की ओर से दायर आपराधिक मानहानि के मामले में आज अभियुक्त प्रिया रमानी के खिलाफ आरोप तय किए। सुनवाई के दौरान प्रिया रमानी कोर्ट में मौजूद थीं। उन्होंने सभी आरोपों से इनकार किया। आज कोर्ट ने प्रिया रमानी को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होने की स्थाई छूट दे दी। इस मामले में अगली सुनवाई 4 मई को होगी। 4 मई को एमजे अकबर से जिरह की जाएगी। 25 फरवरी को कोर्ट ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और पत्रकार एमजे अकबर द्वारा दायर आपराधिक मानहानि के मामले में पत्रकार प्रिया रमानी को जमानत दी थी। एडिशनल चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट समर विशाल ने प्रिया रमानी को दस हजार रुपए के निजी मुचलके पर जमानत दी थी।

25 फरवरी को रमानी ने कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट के लिए भी याचिका दायर की थी। इस याचिका का एमजे अकबर के वकील ने विरोध किया था, जिसके बाद रेबेका जॉन ने कहा था कि आपके मुवक्किल एमजे अकबर भी तो कोर्ट नहीं आए हैं।शिकायतकर्ता को तो कोर्ट में खुद मौजूद होना चाहिए।
29 जनवरी को कोर्ट ने प्रिया रमानी को समन जारी किया था । इस मामले में सात लोगों ने अपने बयान दर्ज कराए थे। 11 जनवरी को जिन लोगों के बयान दर्ज हुए उनमें तपन चाकी, मंजर अली और रचना गोयल शामिल हैं। तपन चाकी पेशे से कम्युनिकेशंस कंसल्टेंट हैं। उन्होंने कोर्ट को बताया था कि वह एमजे अकबर को पिछले 30 सालों से जानता है। जब एमजे अकबर द संडे के संपादक थे तो तपन चाकी उनके लिए लिखा करते थे। चाकी ने बताया था कि एमजे अकबर एक सज्जन व्यक्ति हैं और उनकी छवि एक व्यवहार कुशल और दोस्ताना व्यक्ति की है। जब उन्हें प्रिया रमानी के ट्वीट्स के बारे में जानकारी मिली तो काफी आश्चर्य और दुख हुआ।

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