ई-माइग्रेट सेवाएं सुलभ बनाने के लिए विदेश मंत्रालय ने एमओयू पर किए हस्ताक्षर

नई दिल्ली (शाश्वत तिवारी)। विदेश मंत्रालय ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और सामान्य सेवा केंद्र ई-गवर्नेंस सर्विसेज इंडिया लिमिटेड के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं, ताकि देश में सामान्य सेवा केंद्र (सीएससी) के माध्यम से ई-माइग्रेट सेवाएं प्रदान करने के लिए सीएससी एसपीवी तथा विदेश मंत्रालय के बीच तालमेल बनाया जा सके। इससे विदेशों में रोजगार की तलाश करने वाले नागरिकों को अपने देश के जालसाज तथा फ्रॉड एजेंसियों के शोषण से बचाने में मदद मिलेगी।

इस समझौता ज्ञापन पर संयुक्त सचिव (ओई एवं पीजीई) प्रभाग, विदेश मंत्रालय, ब्रम्हा कुमार, संयुक्त सचिव (डिजीगव), एमईआईटीवाई, संकेत भोंडवे और अक्षय झा, सीओओ, सीएससी ई-गवर्नेंस सर्विसेज इंडिया लिमिटेड ने हस्ताक्षर किए। एमओयू के तहत, विदेश मंत्रालय के ई-माइग्रेट पोर्टल को सीएससी के पोर्टल के साथ एकीकृत किया जाएगा, ताकि सीएससी के माध्यम से नागरिकों को जरूरी ई-माइग्रेट सेवाएं प्रदान की जा सके। एक आधिकारिक बयान के अनुसार सीएससी के माध्यम से ई-माइग्रेट पोर्टल पर आवेदकों के पंजीकरण की सुविधा होगी और साथ ही ई-माइग्रेट पोर्टल पर आवेदकों के लिए आवश्य दस्तावेजों को अपलोड करने और संसाधित करने की भी सुविधा होगी। बयान में कहा गया है कि सीएससी के माध्यम से पोर्टल पर पंजीकृत प्रवासी श्रमिकों या आवेदकों द्वारा आवश्यक चिकित्सा और अन्य सेवाओं के लिए बुकिंग की सुविधा मिलेगी।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार की शाम सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा सुरक्षित और कानूनी प्रवास को बढ़ावा! विदेश में भारतीय श्रमिकों के रोजगार और गतिशीलता को बढ़ावा देने के लिए विदेश मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और सीएससी ई-गवर्नेंस सर्विसेज इंडिया लिमिटेड के बीच एक त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इसके साथ ही, विदेश मंत्रालय के ‘ई-माइग्रेट’ पोर्टल को भारत भर में 5 लाख से अधिक सीएससी के साथ एकीकृत किया जा रहा है, जिससे विदेश मंत्रालय की सेवाएं जमीनी स्तर तक पहुंच सकेंगी।

दरअसल ई-माइग्रेट परियोजना मुख्य रूप से उत्प्रवास जांच (इमिग्रेशन चेक) अपेक्षित देशों में जाने वाले श्रमिकों की सहायता के लिए शुरू की गई है। इस परियोजना की अवधारणा उत्प्रवास प्रक्रिया को ऑनलाइन सहज बनाकर प्रवासी श्रमिकों के सामने आने वाली समस्याओं का समाधान करने और सुरक्षित व कानूनी प्रवास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विदेशी नियोक्ताओं और पंजीकृत भर्ती एजेंटों एवं बीमा कंपनियों को एक साझा मंच पर लाने के लिए की गई थी।

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