उत्तराखंड में पारे में उछाल जारी है। आगामी दो दिनों तक प्रदेश को मौसम से राहत मिलने के आसार नहीं हैं

 उत्तराखंड में पारे में उछाल जारी है। आगामी दो दिनों तक प्रदेश को मौसम से राहत मिलने के आसार नहीं हैं।  शुक्रवार से इसमें बदलाव की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार 10 और 11 मई को प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में बारिश हो सकती है। इससे पारे की रफ्तार पर भी अंकुश लगेगा। वहीं जंगलों में आग भी विकराल रूप धारण करती जा रही है।

चिलचिलाती धूप से देहरादून में लोग बेचैन हैं। दून का पारा सामान्य से चार डिग्री अधिक 38.0 व न्यूनतम तापमान 17.5 डिग्री सेल्सियस रहा। मसूरी में अधिकतम 25.9 व न्यूनतम 15.2 डिग्री सेल्सियस रहा। प्रदेश में जसपुर सबसे गर्म दिन रहा। यहां तापमान 39.6 डिग्री सेल्सियस रहने से लोग गर्मी से बेचैन रहे।

उधर, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ और उत्तरकाशी में सूरज की तपिश से लोग परेशान हैं। पर्वतीय शहरों में उत्तरकाशी सबसे गर्म रहा। यहां तापमान 36 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। गर्मी बढ़ने से देहरादून में दिन के समय सड़कें सूनी हो रही हैं। शाम चार बजे के बाद अधिकतर लोग अपने घरों से बाहर निक रहे। 

मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार अभी भी पारे में उछाल आने की संभावना है। राज्य मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक बिक्रम सिंह के मुताबिक फिलहाल तापमान सामान्य से एक से दो डिग्री अधिक रह सकता है।

जंगल की आग विकराल, 24 घंटे  में 44 घटनाएं

पारे की उछाल के साथ ही प्रदेशभर में जंगल की आग विकराल रूप धारण करने लगी है। पिछले 24 घंटे के दरम्यान ही आग की 44 घटनाएं सामने आई हैं। इसके साथ ही राज्य में अब तक जंगल की आग की घटनाओं की संख्या बढ़कर 216 पहुंच गई है। इसमें 272 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है और 38 लाख रुपये से अधिक की क्षति का अनुमान है। 

जैसे-जैसे तापमान बढ़ रहा है, वैसे-वैसे जंगल भी तेजी से धधक रहे हैं। इससे वन महकमे की चिंता में भी इजाफा हो रहा है। पिछले 24 घंटे के दरम्यान तो आग बुझाने में वनकर्मियों को पसीने छूट गए। इस दौरान विभिन्न स्थानों पर आग की 44 घटनाएं हुई। हालांकि, कई जगह आग लगी हुई है, जिस पर ग्रामीणों के सहयोग से काबू पाने के प्रयास जारी हैं। 

जंगल की आग (अब तक) 

क्षेत्र—————–घटनाएं——- प्रभावित क्षेत्र——-क्षति 

गढ़वाल—————66————-66.05———-84812.5 

कुमाऊं————–140———– 195.475——-286613 

वन्यजीव परिरक्षण-10—————11.45——12337.5 

(नोट: क्षेत्र हेक्टेयर और क्षति रुपये में) 

  

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