दुनिया में बज रहा योग का डंका, तुर्कमेनिस्तान ने निकाली प्रशिक्षक की भर्ती

-शाश्वत तिवारी

वैश्विक महामारी कोविड-19 में भारत की अमूल्य धरोहर योग और आयुर्वेद दुनिया के लिए संजीवनी बनकर उभरे हैं। विश्व के तमाम देशों के लोग योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना रहे हैं। योग का प्रभाव किस तरह बढ़ रहा है, इसका अंदाज़ा तुर्कमेनिस्तान के इस विज्ञापन से लगा सकते हैं, जिसने योग प्रशिक्षक की भर्ती निकाली है। इसके लिए तुर्कमेनिस्तान ने भारत से सहायता मांगी है। इस बारे में आयुष मंत्रालय ने बताया कि तुर्कमेनिस्तान ने भारतीय दूतावास को पत्र लिखकर अपने अशगबत शहर स्थित ट्रेडिशन मेडिसिन सेंटर के लिए योग गुरू मांगा है। शुरू में योग प्रशिक्षक की नियुक्ति की अवधि एक वर्ष तक रहेगी, जिसे आगे तीन वर्ष के लिए बढ़ाया भी जा सकता है। इसके लिए आवेदन की अंतिम तिथि 4 जुलाई 2021 है। आवेदन के बाद उम्मीद्वारों को आयुष मंत्रालय द्वारा साक्षात्कार के लिए बुलाया जाएगा।

यह होनी चाहिए योग्यता:
इस पद के लिए मंत्रालय ने कुछ अहर्ताएं भी रखी हैं, जिसमें आवेदन करने वाला उम्मीदवार आईएमसीसी अधिनियम 1970 के तहत मान्यता प्राप्त किसी भी आर्युवेदिक कॉलेज से स्नातक होना चाहिए। साथ ही उम्मीद्वार को कम से कम 5 वर्ष का क्लिनिकल अनुभव होना चाहिए। इसके अलावा उम्मीद्वार को किसी सरकारी अस्पताल से अपना मेडिकल सर्टिफिकेट लाना होगा। यही नहीं उम्मीदवार को मान्यता प्राप्त योग प्रशिक्षक के सर्टिफिकेट के साथ ही कम्यूटर का ज्ञान होना भी आवश्यक है। उम्मीदवार का चयन आयुष मंत्रालय द्वारा गठित समिति करेगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने की थी अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पहल:
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल और भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रयासों का नतीजा है कि योग का डंका आज दुनिया में बज रहा है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की पहल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 27 सितम्बर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण के माध्यम से की थी। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत अशोक मुखर्जी द्वारा योग दिवस को लेकर प्रस्ताव पेश किया गया। इसमें सह प्रायोजक के रूप में 175 काउंटी थे, जो महासभा के किसी भी प्रस्ताव के लिए उच्चतम था। इसके बाद 21 जून अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया गया। 11 दिसम्बर 2014 को संयुक्त राष्ट्र में 193 सदस्यों द्वारा 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को मनाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली। प्रधानमंत्री मोदी के इस प्रस्ताव को 90 दिन के अंदर पूर्ण बहुमत से पारित किया गया।

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