पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का कहना है, की उन्हें न्यायालय पर पूरा भरोसा है…

कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का कहना है कि उन्हें न्यायालय पर पूरा भरोसा है। न्यायालय पहले भी उनके साथ न्याय कर चुका है। जब एक षड़यंत्र के तहत सरकार को बर्खास्त करने का प्रयास किया गया तब न्यायालय ने ही उन्हें वापस सत्ता में बिठाया था। उन्होंने कहा कि इस स्टिंग प्रकरण के जितने भी एक्टर हैं, वे सारे राजनीतिक और आर्थिक रूप से धराशायी हो जाएंगे। जहां तक गिरफ्तारी की बात है तो उन्हें इसका कोई डर नहीं। अपने राजनीतिक कैरियर में वह कई बार गिरफ्तार हो चुके हैं।

देहरादून पहुंचे हरीश रावत ने पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में कहा कि सरकार गिराने में नाकाम रहने के कारण मिली राजनीतिक पराजय को जीत में बदलने के लिए सीबीआइ का प्रयोग किया जा रहा है। जो भी इस स्टिंग प्रकरण में शामिल रहे हैं वे सभी राजनीतिक और आर्थिक रूप से ध्वस्त हो जाएंगे। इससे प्रदेश की राजनीति को बहुत सारी बुराइयों से मुक्ति मिलेगी।

उन्होंने कहा कि यह मामला लंबा चलेगा इससे वह और उनका परिवार भी आर्थिक रूप से टूट सकता है। क्योंकि यह प्रक्रिया काफी महंगी होती है। उन्होंने कहा कि जो लोग चाहते हैं कि वह गिरफ्तार हों, इसके लिए उन्हें अभी से शुभकामनाएं। उन्हें गिरफ्तारी का कोई डर नहीं है और वह पहले भी गिरफ्तार हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि सीबीआइ का दुरुपयोग कर यह राजनीतिक कृत्य किया जा रहा है। कांग्रेस को इसका जवाब राजनीति से देना चाहिए।

सरकार को दी शुभकामनाएं, मुख्यमंत्री को बताया कड़क 

हरीश रावत ने प्रदेश सरकार को ढाई वर्ष का कार्यकाल पूरा करने पर शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि वह इस औपचारिकता को जरूर निभाएंगे। प्रदेश में राजनीतिक स्थिरता जरूरी है। इसलिए वह चाहते हैं कि सरकार पांच साल चले ताकि जनता सरकार का सही तरह से मूल्यांकन कर सके कि उसकी आकांक्षाओं के पूरा न हो पाने का दोषी कौन है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का एक गुण है उनका कड़क और साफ छवि का होना। हालांकि, सरकार ने ऐसा कोई ठोस कदम नहीं उठाया है जिसके लिए उनकी तारीफ की जा सके।

पंचायत चुनावों में अपने उम्मीदवार न थोपे जाएं 

कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव ने कहा कि पंचायत चुनाव वर्ष 2022 में आने वाले विधानसभा चुनावों के लिए टर्निग प्वाइंट हो सकते हैं। यह कांग्रेस के पर है कि वह इन चुनावों को कैसे मैनेज करती है। यह जरूर देखना होगा कि जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर जबरन उम्मीदवार न थोपे जाएं। इससे पार्टी में गुटबाजी बढ़ सकती है। आपसी समन्वय से चुनाव लड़े जाएं। कांग्रेस को तोड़ने की नहीं जोड़ने की जरूरत है।

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