
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बजट पेश करते हुए न सिर्फ आर्थिक रोडमैप रखा, बल्कि सियासी तौर पर भी जोरदार संदेश दिया। उन्होंने बिना नाम लिए पूर्ववर्ती आम आदमी पार्टी सरकार पर तीखा हमला बोला और साफ संकेत दिया कि वोट बैंक और फ्री बीज की राजनीति ने राजधानी की रफ्तार को थाम दिया था, जिसे अब उनकी सरकार ट्रिपल इंजन की ताकत से पटरी पर लौटा रही है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली अब घोषणाओं की राजनीति से निकलकर परिणामों की राजनीति में प्रवेश कर चुकी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब सरकार का काम कागजों में नहीं, जमीन पर दिख रहा है और यही असली बदलाव है। लिहाजा शासन अब व्यवस्था नहीं, बल्कि विश्वास का माध्यम बन चुका है।
अपने भाषण में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को केंद्र में रखते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की दूरदर्शी नीतियों और तेज रफ्तार परियोजनाओं ने दिल्ली की अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा दी है। साथ ही केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के सहयोग का उल्लेख करते हुए उन्होंने केंद्र की मजबूत हैंडहोल्डिंग को विकास की सबसे बड़ी कुंजी बताया।
सीएम ने कहा कि दिल्ली की अर्थव्यवस्था हमेशा राष्ट्रीय औसत से बेहतर रही, लेकिन 2021-22 से 2024-25 के बीच बुनियादी ढांचे में निवेश की कमी और फ्री बीज कल्चर के कारण विकास दर प्रभावित हुई। इसका असर यह हुआ कि स्टार्टअप, उद्यमी और हाई-स्किल मैनपावर दिल्ली से बाहर जाने लगे, जिससे राजस्व में गिरावट दर्ज की गई।
हालांकि, उन्होंने दावा किया कि अब तस्वीर तेजी से बदल रही है। वर्ष 2024-25 में दिल्ली का जीएसडीपी 8.9 प्रतिशत की दर से बढ़कर 12.13 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जबकि 2025-26 में इसके 13.27 लाख करोड़ तक जाने का अनुमान है। राष्ट्रीय जीडीपी में दिल्ली की हिस्सेदारी भी बढ़कर 3.72 प्रतिशत होने की उम्मीद जताई है।
विधानसभा में विपक्ष की अनुपस्थिति पर अध्यक्ष नाराज, आतिशी को लिखा पत्र
विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने विधानसभा में विपक्ष के लगातार अनुपस्थित रहने पर नाराजगी जताई है। मामले में उन्होंने नेता प्रतिपक्ष आतिशी को पत्र लिखा है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि चार विधायकों के खिलाफ नियमों के तहत ही कार्रवाई की गई है।
विधानसभा में अध्यक्ष ने कहा कि निलंबन का फैसला उपराज्यपाल के अभिभाषण के दौरान लगातार बाधा और अनुशासनहीन व्यवहार के कारण लिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने निलंबन के कारणों को सही ढंग से बताने के बजाय भ्रामक जानकारी फैलाने की कोशिश की। पत्र में यह भी कहा गया कि 21 मार्च की बैठक में नेता प्रतिपक्ष को सदन में मौजूद रहने और मामले को सदन पर छोड़ने की सलाह दी गई थी, लेकिन उन्होंने कार्यवाही से दूरी बनाए रखी। स्पीकर ने अपने ऊपर लगे पक्षपात के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी अध्यक्षता में सदन पहले से ज्यादा सहनशील रहा है।
निलंबित विधायक माफी मांगें : अध्यक्ष
उन्होंने निलंबित विधायकों से अपने व्यवहार पर खेद जताने और माफी मांगने की अपील की। साथ ही विपक्ष से कहा कि वे सदन से बाहर रहकर नहीं, बल्कि चर्चा में भाग लेकर जनता के मुद्दे उठाए।



