
मौसम में बदलाव के साथ ही अब अल नीनो ने प्रदूषण के असर को भी काफी हद प्रभावित किया है। इसका ताजा उदाहरण है प्रदूषण के नक्शे पर अल नीनो का असर। उत्तर भारत की जगह दक्षिण भारत में ज्यादा प्रदूषण देखने को मिला।
उत्तर भारत में 2022-2023 के सर्द मौसम साफ रहे। इसकी वजह पीएम 2.5 के स्तर में 30 फीसदी की कमी रही। इसके उलट दक्षिण भारत की हवा प्रदूषित रही, क्योंकि वहां हवा में पीएम 2.5 के स्तर में 45 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई। वहीं अगले साल हालात एकदम उलट गए। उत्तर में दक्षिण के मुकाबले ज्यादा प्रदूषण रहा।
ला नीनो और अल नीनो ने प्रदूषण का रास्ता बदल दिया
हालिया प्रकाशित स्टडी में इसकी मुख्य वजह का खुलासा किया गया है। 2022-2023 में भारत पर ला नीना का असर रहा जबकि 2023-2024 की सर्दियों में अल नीनो का असर रहा। ‘एटमॉस्फेरिक पॉल्यूशन रिसर्च’ जर्नल में गुरुवार को प्रकाशित एक शोध पत्र में इस बात का जिक्र है। रिपोर्ट ‘एयर क्वालिटी इन फ्लक्स: द बैफ्लिंग एनएसओ ट्रांजिशन इन इंडिया’शीर्षक से प्रकाशित है। इसमें बताया गया है कि ला नीनो और अल नीनो ने पीएम 2.5 के रास्तों को बदल दिया। इन प्राकृतिक जलवायु चक्र ने मौसम की उन स्थितियों को भी प्रभावित किया जो ये तय करती हैं कि प्रदूषण हवा में फैलेंगे या एक जगह जमा होंगे।
प्रदूषक तत्व पर डालती हैं असर
ये तो पहले से ही पता था कि वायुमंडल के हालात प्रदूषण पर असल डालते हैं और उनके स्तर को कंट्रोल करते हैं। इस ताजा अध्ययन में ये बताया गया है कि सर्दियों के दौरान ‘अल नीनो’ और ‘ला नीना’ की वजह से वातावरण का व्यवहार कितना अलग हो सकता है। इससे ये भी पता चलता है कि प्रदूषक तत्व कहां जमा होंगे और कहां चले जाएंगे।
दिल्ली-एनसीआर में दिखता है सर्दियों में प्रदूषण का स्तर
बता दें कि सर्दियों के आते ही दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण गहराने लगता है। पराली और वाहनों से निकलने वाले धुएं को लेकर आए दिन कुछ ना कुछ देखने पढ़ने को मिलता है। इसी कड़ी में शोधकर्ताओं ने ये भी साफ किया है कि इस अध्ययन से यह साबित नहीं होता कि ‘अल नीनो’ के कारण दिल्ली या उत्तर भारत में हवा की गुणवत्ता हमेशा खराब ही होगी।
बदल भी सकता है पैर्टन
रिपोर्ट को लिखने वाले वायुमंडलीय वैज्ञानिक गुफरान बेग ने बताया कि इस स्टडी से साफ नहीं होता कि 2023-24 का ‘अल नीनो’ पैटर्न इस सर्दी में फिर से दोहराया जाएगा। उन्होंने बताया कि हमने जिन दो सालों की स्टडी की है वे सामान्य नहीं थे। बताया कि इस साल का अल नीनो अब तक का सबसे शक्तिशाली हो सकता है। अध्ययन में पाया गया कि 2022-23 की ‘ला नीना’ वाली सर्दियों के दौरान उत्तर भारत में तेज हवाएं चलीं। इस वजह से पराली जलाने और स्थानीय स्रोतों से निकलने वाला प्रदूषण फैल गया।
दिल्ली से दूर चले गए प्रदूषण
हवा के बदले बहाव की वजह से प्रदूषक तत्व दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों से दूर चले गए। ये आगे बढ़ते-बढ़ते दक्षिण की ओर चले गए। इस वजह से दक्षिण भारत के शहर मुंबई और तिरुवनंतपुरम में पीएम 2.5 का स्तर काफी बढ़ गया।
वहीं अगली सर्दियों में हालात बदल गए और अल नीनो के प्रभाव में उत्तर भारत में हवाएं कमजोर पड़ गईं। परिणाम स्वरूप हवाएं प्रदूषक तत्वों को दूर ले जाने के बजाय दिल्ली और जयपुर जैसे इलाकों से होकर गुजरने लगीं। इससे जयपुर में 2019-22 में प्रदूषण में 50 फीसदी और दिल्ली में 10 फीसदी बढ़ गया।
कुल मिलाकर, अध्ययन में पाया गया कि 2019 ले 2022 के दौरान पीएम 2.5 के स्तर में साल-दर-साल काफी उतार-चढ़ाव आए। इस वजह से 40 फीसदी की कमी से लेकर 70 फीसदी की बढ़ोतरी के लिए जिम्मेदार रहे।



