
आमतौर पर माना जाता है कि मेनोपॉज एक बहुत ही धीमी प्रक्रिया है, जिसमें महिलाओं के शरीर को पूरी तरह बदलने में कई साल लग जाते हैं। लेकिन हाल ही में हुए एक बड़े शोध ने इस पुरानी धारणा को गलत साबित कर दिया है। नई जानकारी के मुताबिक, मेनोपॉज के दौरान महिलाओं के शरीर में धीरे-धीरे नहीं, बल्कि अचानक और बहुत बड़े स्तर पर बदलाव आते हैं।
एक अचानक आने वाला शारीरिक मोड़
जब महिलाओं को अपने जीवन के आखिरी पीरियड्स आते हैं, तो उनका शरीर किसी धीमी प्रक्रिया से नहीं गुजरता। इसके बजाय, यह एक ‘फिजियोलॉजिकल क्लिफ’ यानी शारीरिक बदलाव के एक बहुत बड़े और अचानक आने वाले मोड़ का सामना करता है। इन अचानक होने वाले बदलावों से ठीक पहले सेक्स हार्मोन के स्तर में भी बहुत तेजी से उतार-चढ़ाव होता है।
10 लाख महिलाओं के डेटा पर हुई बड़ी रिसर्च
यह खुलासा एक बेहद विस्तृत अध्ययन के बाद हुआ है। वाइजमैन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के शोधकर्ताओं ने अमेरिका और इजरायल की 10 लाख से ज्यादा महिलाओं के आंकड़ों का गहराई से अध्ययन किया। उन्होंने इन महिलाओं के 30 करोड़ से अधिक लैबोरेटरी टेस्ट के नतीजों का विश्लेषण किया। ‘नेचर मेडिसिन’ जर्नल में प्रकाशित इस शोध के नतीजों में सेहत और शरीर के कामकाज से जुड़े दर्जनों पैमानों में बड़े और अचानक बदलाव देखे गए।
शरीर के लगभग हर सिस्टम पर असर
इस रिसर्च के दौरान जांचे गए 90 अलग-अलग तरह के लैबोरेटरी टेस्ट में से 52 में अचानक आए ये बदलाव साफ तौर पर नजर आए। ये बदलाव सिर्फ प्रजनन क्षमता के खत्म होने या सेक्स हार्मोन तक सीमित नहीं थे, बल्कि इससे कहीं ज्यादा थे। इसका सीधा असर शरीर के लगभग हर प्रमुख सिस्टम पर दिखा। इनमें हड्डियों की सेहत, लिवर और किडनी का काम करने का तरीका और कोलेस्ट्रॉल का स्तर मुख्य रूप से शामिल था।
हार्मोन थेरेपी से दिखा कम बदलाव
इस शोध में एक और अहम बात सामने आई है। डेटा के मुताबिक, जिन महिलाओं को मेनोपॉज के दौरान हार्मोन थेरेपी दी जा रही थी, उनके शरीर में ये अचानक होने वाले बदलाव काफी कम देखे गए।



