अमेरिका की तर्ज पर भारत में विकसित हो रही एकीकृत रक्षा प्रणाली

भारत लगातार अपनी सेना को मजबूत करने के लिए कई कदम उठा रहा है। इसी तर्ज पर केंद्र सरकार अमेरिका की तर्ज पर एकीकृत लॉजिस्टिक प्रणाली (integrated logistics structure) तैयार कर रही है।

इस एकीकृत लॉजिस्टिक प्रणाली को तैयार करने का मकसद साफ है, तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल। अक्सर युद्ध या संघर्ष के दिनों में तीनों सेना (थल, जल और वायुसेना) के बीच तालमेल बैठाने में कई तरह की वास्तविक परेशानियां देखी गई हैं। इसी वजह से ऐसी प्रणाली को बनाने की रजामंदी सरकार ने दी हो जो थिएयर कमांड को सहयोग करे।

कौन कर रहा इस परियोजना का नेतृत्व

एकीकृत लॉजिस्टिक ढांचा के परियोजना के काम का नेतृत्व डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री अफेयर्स (DMA)कर रहा है।

किसने की थी मांग

इसकी जानकारी डीएमए के संयुक्त सचिव (नौसेना और रक्षा स्टाफ) रियर एडमिरल कुणाल सिंह राजकुमार के पत्र से मिली है। उन्होंने अपने पत्र में राज्यसभा सांसद अजीत माधवराव गोपचाडे को इससे जुड़ी जानकारी दी है। इससे पहले राज्यसभा सदस्य अजीत ने पीएम मोदी से इसको लेकर पत्र लिख कर ऐसे ही एक ढांचे बनाने की संभावनाओं पर विचार करने का आग्रह किया था। उन्होंने पत्र में अमेरिका के डिफेंस लॉजिस्टिक्स एजेंसी का जिक्र कर बताया था कि भारत में भी एकीकृत रक्षा लॉजिस्टिक्स और ईंधन प्रबंधन ढांचा बना कर सेना को और मजूबत किया जा सकता है।

कैसे काम करती है अमेरिका की डीएलए

सांसद गोपचाडे ने अमेरिकी की डिफेंस लॉजिस्टिक्स एजेंसी (डीएल) के काम के बारे में विस्तार से अपने पत्र में जिक्र किया है। उन्होंने लिखा कि ये पूरे अमेरिका के रक्षा विभाग के लिए एकल युद्ध संबंधी लॉजिस्टिक सहायता एजेंसी के तौर पर काम करती है।

क्या है इसका मुख्य काम

ये तीनों सेना से जुड़ी संरचना के तहत ईंधन की आपूर्ति, स्पेयर पार्ट्स, सैन्य सामानों की खरीद, रक्षा मानकीकरण, वेयरहाउसिंग, तकनीकी सहायता सहित लॉजिस्टिक एआई सिस्टम सहित कई काम देखती है। सांसद अजीत ने एक समाचार पत्र से बातचीत में कहा कि लॉजिस्टिक को और अच्छा बनाने के लिए एआई और मशीन लर्निंग जैसी नई तकनीकों को इसमें जोड़ा जा रहा है।

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